देहरादून/रामनगर।
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणामों में इस बार भी बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं में पास प्रतिशत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे राज्य के शिक्षा स्तर में सुधार के संकेत मिले हैं।
राज्य के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने परिणाम जारी करते हुए बताया कि 12वीं कक्षा का कुल पास प्रतिशत 85.11% रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 1.88% अधिक है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत को दिया।
12वीं में बेटियां आगे
उत्तराखंड बोर्ड के अनुसार, इंटरमीडिएट परीक्षा में लड़कियों का पास प्रतिशत 88.09% रहा, जबकि लड़कों का 81.93% दर्ज किया गया। कुल 1,00,452 परीक्षार्थियों में से 85,499 छात्र-छात्राएं सफल रहे।
इस वर्ष 12वीं में गीतिका पंत (बागेश्वर) और सुशीला मेहंदीरत्ता (उधम सिंह नगर) ने संयुक्त रूप से 98% अंक हासिल कर टॉप किया। गीतिका, जिनके पिता टैक्सी चालक हैं, ने सीमित संसाधनों के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की और आगे इंजीनियर बनने का लक्ष्य रखा है।
टॉपर्स की सूची
दूसरे स्थान पर आर्यन (ऋषिकेश) ने 97.80% अंक प्राप्त किए, जबकि वंशिका (हरिद्वार) 97% अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
10वीं में भी बेहतर प्रदर्शन
हाईस्कूल (10वीं) में भी पास प्रतिशत में 1.33% की बढ़ोतरी हुई है। कुल 1,08,983 छात्रों में से 1,00,373 सफल हुए। यहां भी लड़कियों ने बाजी मारी—लड़कियों का पास प्रतिशत 96.07% रहा, जबकि लड़कों का 88.03%।
10वीं में अक्षत गोपाल (रामनगर) ने 98.20% अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर ईशांत कोठारी (उत्तरकाशी) और भूमिका (नैनीताल) संयुक्त रूप से रहे। तीसरे स्थान पर योगेश जोशी (बागेश्वर) रहे।
बागेश्वर जिला रहा अव्वल
जिलेवार प्रदर्शन में बागेश्वर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इंटरमीडिएट में 94.84% और हाईस्कूल में 96.98% पास प्रतिशत के साथ यह जिला राज्य में पहले स्थान पर रहा।
सीएम ने दी बधाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह उनकी मेहनत और अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने असफल छात्रों को निराश न होने और आगे बेहतर प्रयास करने की सलाह दी।
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इम्प्रूवमेंट परीक्षा का रिजल्ट भी जारी
बोर्ड ने 2025 की सुधार परीक्षा के नतीजे भी जारी किए। हाईस्कूल में 68.67% और इंटरमीडिएट में 66.27% छात्र सफल रहे।
इस बार के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। साथ ही, बढ़ता पास प्रतिशत राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है।



