Tuesday, February 10, 2026

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Army Chief नरवणे की आत्मकथा में देशभक्ति का संदेश

नई दिल्ली।

भारतीय सेना के पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Army Chief Narvane) की हाल ही में प्रकाशित आत्मकथा ने देशभर में चर्चा तेज कर दी है। इस पुस्तक में जनरल नरवणे ने न केवल अपने सैन्य जीवन के अनुभव साझा किए हैं, बल्कि युवाओं को भारतीय सेना जॉइन करने के लिए भी प्रेरित किया है। उनकी यह आत्मकथा देशसेवा, अनुशासन और नेतृत्व की सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है।

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जनरल नरवणे ने अपनी किताब में साफ तौर पर कहा है कि भारतीय सेना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि यह एक मिशन है, जहां व्यक्ति अपने जीवन से पहले देश को प्राथमिकता देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि अगर उनमें साहस, समर्पण और देशभक्ति की भावना है, तो भारतीय सेना उनके लिए सबसे सम्मानजनक विकल्प हो सकती है।

आत्मकथा में सेना के भीतर की सच्चाई

अपनी Memoir में जनरल नरवणे ने सेना के भीतर के अनुशासन, कठिन प्रशिक्षण, युद्ध जैसी परिस्थितियों और निर्णय लेने की चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं का विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि सेना का जीवन आसान नहीं होता, लेकिन यह जीवन व्यक्ति को मजबूत, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनाता है।

किताब में कारगिल युद्ध के बाद की रणनीतिक सोच, सीमाओं पर तनाव, आतंकवाद से निपटने की रणनीति और सैनिकों के बलिदान को भी प्रमुखता से जगह दी गई है। जनरल नरवणे ने लिखा है कि एक सैनिक का जीवन सिर्फ युद्ध लड़ने तक सीमित नहीं होता, बल्कि शांति बनाए रखना भी उतना ही बड़ा दायित्व है।

युवाओं को क्यों जॉइन करनी चाहिए इंडियन आर्मी

पूर्व सेना प्रमुख के अनुसार, भारतीय सेना युवाओं को नेतृत्व, अनुशासन और टीमवर्क सिखाती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब युवा करियर को लेकर असमंजस में रहते हैं, तब सेना उन्हें स्पष्ट उद्देश्य और पहचान देती है।

जनरल नरवणे ने यह भी बताया कि सेना में सेवा करने के दौरान व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनता है, बल्कि मानसिक रूप से भी परिपक्व होता है।

सेना प्रमुख बनने तक का सफर

जनरल एमएम नरवणे ने अपनी आत्मकथा में अपने शुरुआती जीवन से लेकर सेना प्रमुख बनने तक के सफर को ईमानदारी से बयान किया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं।

उनका यह सफर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो यह दिखाता है कि मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी से किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है।

सेना और समाज का रिश्ता

पुस्तक में जनरल नरवणे ने यह भी लिखा है कि सेना और समाज के बीच मजबूत संबंध होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब समाज अपने सैनिकों को सम्मान देता है, तो सैनिक और अधिक निष्ठा से देश की रक्षा करते हैं।

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उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल सेना जॉइन करने तक सीमित न रहें, बल्कि सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना भी रखें।

देशभक्ति और नेतृत्व का पाठ

जनरल नरवणे की यह आत्मकथा सिर्फ एक सैन्य पुस्तक नहीं, बल्कि नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का पाठ है। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की है कि संकट के समय सही निर्णय लेना कितना महत्वपूर्ण होता है और एक नेता को कैसे अपने लोगों के साथ खड़ा रहना चाहिए।

Army Chief नरवणे की Memoir आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक दस्तावेज बनकर उभरी है। भारतीय सेना जॉइन करने का उनका संदेश न केवल देशभक्ति को मजबूत करता है, बल्कि युवाओं को एक उद्देश्यपूर्ण जीवन की दिशा भी दिखाता है। यह किताब उन सभी के लिए खास है, जो देशसेवा, नेतृत्व और अनुशासन को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहते हैं।

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