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समालखा में शुरू हुआ 26वां निरंकारी क्रिकेट टूर्नामेंट, खेल और अनुशासन का अनोखा संगम

समालखा। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक चेतना, मानवीय मूल्यों और खेल भावना को एक सूत्र में पिरोते हुए 26वां बाबा गुरबचन सिंह मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा की पावन धरा पर आज भव्य रूप से आरंभ हुआ। श्रद्धा, अनुशासन और सौहार्द से सराबोर यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मानवता और एकता का संदेश देने वाला प्रेरणादायक उत्सव बन गया है।

10 मार्च 2026 तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में देशभर के विभिन्न राज्यों से चुनी गई 24 टीमें हिस्सा ले रही हैं। पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, जम्मू, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, कोलकाता, गुजरात, दिल्ली और दिल्ली-एनसीआर से आए युवा खिलाड़ी मैदान पर मर्यादा, संयम और भाईचारे का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

खिलाड़ियों का समर्पण और अनुशासन इस आयोजन को साधारण प्रतियोगिता से आगे बढ़ाकर प्रेरणा और सामूहिक प्रगति का उत्सव बना रहा है। इस विराट आयोजन का संचालन संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंदर सुखीजा के नेतृत्व में किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि युवाओं में टूर्नामेंट को लेकर बेहतरीन उत्साह देखने को मिल रहा है और बड़ी संख्या में पंजीकरण प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार, यह टूर्नामेंट खेल प्रतिभा को निखारने के साथ आत्मसंयम, एकता और आध्यात्मिक चेतना को भी मजबूत करता है।

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इस टूर्नामेंट की नींव बाबा हरदेव सिंह जी ने बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति में रखी थी। बाबा गुरबचन सिंह जी का मानना था कि खेलों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अनुशासन, सेवा और संयम की राह पर अग्रसर किया जा सकता है और आज यही भाव इस आयोजन में जीवंत दिखाई देता है।

कार्यक्रम में संत निरंकारी मंडल की प्रधान राजकुमारी जी तथा केंद्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड के उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह जी की उपस्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। इनके साथ मंडल के अन्य पदाधिकारी भी शामिल हुए, जिनकी मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा बढ़ा दी।

टूर्नामेंट 2000 में लुधियाना से हुआ था आरंभ

खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए राजकुमारी जी ने कहा कि यह टूर्नामेंट 2000 में लुधियाना से आरंभ हुआ था और 2021 के बाद भी उसी उद्देश्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बाबा गुरबचन सिंह जी के विचार उद्धृत करते हुए कहा, शरीर स्वस्थ होगा तभी भक्ति हो सकती है। उन्होंने बताया कि खेल हमें सिखाते हैं कि परिस्थितियां कैसी भी हों, मनोस्थिति संतुलित रहनी चाहिए और जीत-हार से ऊपर उठकर प्रेम, नम्रता और भाईचारे की भावना कायम रखनी चाहिए।

उन्होंने खिलाड़ियों को थकना नहीं, अकना नहीं, झुकना नहीं के संदेश के साथ स्वस्थ रहने और खेल भावना को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा दी।

टूर्नामेंट के सुचारू संचालन के लिए व्यापक और व्यवस्थित प्रबंध किए गए हैं। खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए आवास, चिकित्सा सेवाएं, जलपान, सुरक्षा, आपातकालीन सहायता और पार्किंग जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि आयोजन हर दृष्टि से सफल और स्मरणीय बन सके।

मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक उत्थान की दिशा में करेंगे प्रेरित

हर शाम होने वाले सत्संग कार्यक्रम खिलाड़ियों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक उत्थान की दिशा में प्रेरित करेंगे। इससे युवा खेल के साथ जीवन के वास्तविक मूल्यों और उद्देश्यों को समझने की ओर अग्रसर होंगे।

निस्संदेह, सतगुरु के दिव्य मार्गदर्शन में आयोजित यह टूर्नामेंट खेल भावना, मानवता और एकता के आदर्शों को सुदृढ़ करता है तथा समाज को नई दिशा देने वाला प्रेरक आयोजन साबित हो रहा है।

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