नई दिल्ली। दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में से एक Eid ul-Fitr का इंतजार अब अंतिम चरण में है। पवित्र रमजान महीने के समापन के साथ ही ईद के जश्न की तैयारियां तेज हो गई हैं। 18 मार्च 2026 को रमजान का 29वां रोजा पूरा होने के साथ ही चांद दिखने को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है।
सऊदी अरब में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के लोगों से अपील की है कि वे 18 मार्च की शाम को शव्वाल का चांद देखने की कोशिश करें। चांद नजर आने पर अगले दिन ईद मनाई जाएगी। वहीं भारत में भौगोलिक स्थिति के कारण आमतौर पर ईद एक दिन बाद मनाई जाती है। ऐसे में भारत में ईद 20 या 21 मार्च को मनाए जाने की संभावना है, जो चांद दिखने पर निर्भर करेगी।
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इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति Mohamed Bin Zayed Al Nahyan को ईद की शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अरबी भाषा में संदेश साझा करते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों और क्षेत्रीय हालात पर भी चर्चा का जिक्र किया।
ईद-उल-फितर को “रोजा खोलने का त्योहार” भी कहा जाता है, क्योंकि यह रमजान के महीने के समापन का प्रतीक है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग एक महीने तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं और ईद के दिन विशेष नमाज अदा कर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। इस त्योहार की खासियत आपसी भाईचारा, दान-पुण्य और खुशियों का साझा करना है।
ईद से एक दिन पहले “चांद रात” का विशेष महत्व होता है। इस रात लोग आसमान में चांद देखने का इंतजार करते हैं और बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। लोग नए कपड़े, मिठाइयां और तोहफे खरीदते हैं। खासतौर पर सेवइयां, खीर और शीर खुरमा जैसे पारंपरिक व्यंजन इस मौके पर बनाए जाते हैं, जिसके चलते ईद को “मीठी ईद” भी कहा जाता है।
इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए हर महीने की शुरुआत चांद दिखने के बाद ही होती है। यही कारण है कि ईद की तारीख हर साल बदलती रहती है। रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है और इसके बाद शव्वाल महीने की शुरुआत के साथ ईद का त्योहार मनाया जाता है।
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यूएई में इस बार ईद की नमाज केवल मस्जिदों के अंदर ही अदा की जाएगी, जबकि खुले मैदानों में नमाज पर रोक लगाई गई है। यह फैसला क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
कुल मिलाकर, ईद-उल-फितर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का भी संदेश देता है। अब सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं, जहां चांद का दीदार होते ही खुशियों का यह त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

