Thursday, February 26, 2026

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14 साल की लड़कियों के लिए HPV वैक्सीनेशन ड्राइव: सर्वाइकल Cancer रोकथाम की बड़ी तैयारी

नई दिल्ली। सरकार जल्द ही 14 साल की लड़कियों के लिए एकल-डोज ह्यूमन पैपिलोमावायरस HPV वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने वाली है। देश में महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है।यह कैंसर भारत में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, और इसके लगभग 90% मामलों के लिए HPV संक्रमण जिम्मेदार होता है। इसलिए विशेषज्ञ इसे बेहद महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

कौन करवा सकेगा टीकाकरण और कैसे

HPV एक सामान्य संक्रमण है जो कई बार बिना लक्षण के रहता है, लेकिन इसके कुछ प्रकार सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि किशोरावस्था में यानी यौन गतिविधि से पहले दिया गया टीका बेहतर और लंबी सुरक्षा प्रदान करता है।

सरकार का यह 90-दिवसीय राष्ट्रीय अभियान देश की सभी 14 वर्ष की लड़कियों के लिए खुला रहेगा। इसके लिए लड़कियों को U-Win प्लेटफॉर्म पर स्लॉट बुक करना होगा, बिल्कुल वैसे ही जैसे कोविड-19 के दौरान Co-Win पर किया जाता था।

90 दिन बाद भी टीकाकरण बंद नहीं होगा। यह अभियान स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत चलता रहेगा। हर साल लगभग 1.15 करोड़ लड़कियां 14 वर्ष की उम्र में प्रवेश करती हैं, जो इस कार्यक्रम का लाभ उठा सकेंगी।

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कौन-सी वैक्सीन इस्तेमाल होगी

हालांकि भारत ने अपनी खुद की HPV वैक्सीन Cervavac विकसित कर ली है, लेकिन सरकार फिलहाल MSD Pharmaceuticals की Gardasil वैक्सीन का इस्तेमाल करेगी। इसकी वजह यह है कि Cervavac को अभी WHO की मंजूरी नहीं मिली है और ICMR इसकी single-dose efficacy का अध्ययन कर रहा है।
Gardasil HPV के कई उच्च-जोखिम वाले प्रकारों विशेषकर HPV 16 और 18 से सुरक्षा देती है, जो दुनिया भर में 70% सर्वाइकल कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। GAVI Vaccine Alliance भारत को 2.6 करोड़ डोज उपलब्ध कराएगा, जो दो वर्षों के लिए पर्याप्त होगा। इनमें से 1 करोड़ डोज पहले ही भारत पहुंच चुकी हैं।

क्या एक ही डोज काफी है

हां। WHO की विशेषज्ञ समिति ने 2022 में सिफारिश की थी कि 20 वर्ष तक की लड़कियों के लिए एक डोज पर्याप्त है, जबकि 21 वर्ष से ज्यादा उम्र वाली महिलाओं के लिए 6 महीने के अंतर पर दो डोज की जरूरत होती है। कमजोर प्रतिरक्षा वाली महिलाओं जैसे HIV संक्रमण वाली को तीन डोज लेने की सलाह दी जाती है।

क्यों जरूरी है HPV वैक्सीनेशन अभियान

भारत दुनिया में सर्वाइकल कैंसर के सबसे अधिक मामलों वाले देशों में शामिल है। हर वर्ष 1.25 लाख नए मामले सामने आते हैं और करीब 75,000 महिलाओं की मौत होती है। कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि HPV वैक्सीन संक्रमण, pre-cancerous lesions और यहां तक कि कैंसर होने की संभावना को भी बेहद कम कर देती है।
स्वीडन में 2020 में हुए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि 17 साल की उम्र से पहले वैक्सीन लेने वाली महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का जोखिम 88% कम हो गया। इससे लड़कों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है, क्योंकि संक्रमण के प्रसार में कमी आती है और इससे अन्य HPV-संबंधित कैंसरों में भी कमी आती है।

ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण क्यों महत्वपूर्ण है

ऑस्ट्रेलिया ने 2007 में लड़कियों और 2013 में लड़कों को भी HPV वैक्सीन देना शुरू किया।
10 वर्षों में:

युवा महिलाओं में HPV संक्रमण: 22.7% से घटकर 1.5%

25+ उम्र की महिलाओं में संक्रमण: 11.8% से घटकर 1.1%

भारत में भी इसी तरह की सफलता मिलने की उम्मीद है।

क्या पहले भारत में HPV टीकाकरण हुआ है

हां। कई राज्यों ने पहले सीमित स्तर पर HPV वैक्सीनेशन शुरू किया था:

सिक्किम (2018): 95% से अधिक कवरेज

पंजाब (2016): 97% से अधिक कवरेज

दिल्ली (2016): कार्यक्रम शुरू हुआ, लेकिन हॉस्पिटल-आधारित होने से गति नहीं पकड़ पाया

यह कदम क्यों ऐतिहासिक है

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन दुनिया भर में कारगर साबित हुआ है। ऐसे में भारत का यह निर्णय आने वाले वर्षों में:

महिलाओं की जान बचाएगा

अस्पतालों पर पड़ने वाला दबाव कम करेगा

कैंसर के बोझ को घटाएगा

विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि यह अभियान भारत को विश्व के उन देशों में शामिल कर सकता है जो सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लक्ष्य के करीब पहुंच चुके हैं।

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