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Iran–Israel युद्ध: बढ़ता संघर्ष, लारीजानी की मौत का दावा और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव

नई दिल्ली। ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। मंगलवार को संघर्ष ने और खतरनाक मोड़ ले लिया, जब इज़राइल के रक्षा मंत्री ने दावा किया कि ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी एक हवाई हमले में मारे गए हैं। हालांकि इस दावे की अभी तक ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में भी तनाव का असर साफ दिखाई दे रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के बनी यास इलाके में एक मिसाइल के मलबे से एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई। यह मलबा इज़राइल द्वारा इंटरसेप्ट की गई मिसाइल का बताया जा रहा है। वहीं दुबई और कतर की राजधानी दोहा में भी मंगलवार सुबह कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।

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समुद्री सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है। यूके मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, फुजैरा के पूर्व में एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे उसे मामूली नुकसान पहुंचा। इसी क्षेत्र के फुजैरा ऑयल इंडस्ट्री ज़ोन में एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद आग लग गई, हालांकि इन घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुआ।

इराक की राजधानी बगदाद में भी हालात तनावपूर्ण हैं। अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाते हुए ड्रोन और रॉकेट हमलों की एक बड़ी लहर चली। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह अब तक का सबसे तीव्र हमला था, जिसमें कम से कम पांच ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

इजराइल ने संकेत दिया है कि वह इस युद्ध को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर चुका है। उसने कम से कम तीन और हफ्तों तक सैन्य अभियान जारी रखने की योजना बनाई है। इस दौरान उसने ईरान के कई ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं और लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी है।

लेबनान में इज़राइली हमलों के कारण स्थिति बेहद खराब हो गई है। एक हमले में पांच लेबनानी सैनिक घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। अब तक इन हमलों में 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।

दूसरी ओर, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि वह “गैरकानूनी आक्रमण” के आगे झुकेगा नहीं और उसके नागरिक गंभीर खतरे में हैं। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें 160 से अधिक बच्चों की मौत होने का दावा किया गया है।

ऊर्जा आपूर्ति पर भी इस युद्ध का बड़ा असर पड़ रहा है। यूएई के शाह गैस फील्ड का संचालन ड्रोन हमले के बाद बंद है और फुजैरा पोर्ट पर भी तेल लोडिंग रुक गई है। इससे वैश्विक तेल कीमतों में 2% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भारत के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे अपने जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है। इसी बीच भारत का एलपीजी कैरियर ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से गुजरात के वाडीनार बंदरगाह पहुंच गया है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशें जारी हैं। ग्रीस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और स्थायी समाधान की मांग की है, जबकि चीन ने ईरान और अन्य प्रभावित देशों को मानवीय सहायता देने की घोषणा की ह

यह संघर्ष अब केवल ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते।

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