
नई दिल्ली। PM नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भारत वापसी को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि 125 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत की अमूल्य विरासत अपने घर लौटी है। दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने इन अवशेषों को भारत से बाहर ले जाया, उनके लिए ये सिर्फ एंटीक पीस थे, लेकिन भारत के लिए ये आस्था, पहचान और अध्यात्म का आधार हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी के काल में भारत की धरोहर को छीना गया था और बाद में इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने की कोशिश भी की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने यह संकल्प लिया था कि इन पवित्र अवशेषों की नीलामी नहीं होने दी जाएगी। पीएम मोदी ने इस प्रयास में सहयोग के लिए गोदरेज समूह का आभार जताया, जिनकी मदद से बुद्ध की यह विरासत वापस भारत लाई जा सकी।दरअसल, वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा (कपिलवस्तु क्षेत्र) में खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध से जुड़े ये अवशेष प्राप्त हुए थे।
यह खुदाई ब्रिटिश शासनकाल में तत्कालीन इंजीनियर डब्ल्यू. सी. पेपे द्वारा कराई गई थी। उसी समय इन अवशेषों को भारत से बाहर भेज दिया गया था, जो अब 125 वर्षों बाद वापस देश लाए गए हैं।इन पवित्र अवशेषों को दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित विशेष प्रदर्शनी में रखा गया है। उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बुद्ध को पुष्प अर्पित किए और देश-विदेश से आए बौद्ध गुरुओं को सम्मानित भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध का ज्ञान पूरी मानवता की साझा धरोहर है। हाल के महीनों में जब ये अवशेष विभिन्न देशों में प्रदर्शित किए गए, तो वहां आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा। थाईलैंड में 40 लाख से अधिक लोगों ने इनके दर्शन किए, मंगोलिया में लोग घंटों लाइन में खड़े रहे और रूस में भी लाखों श्रद्धालुओं ने इन्हें नमन किया।

उन्होंने कहा कि बुद्ध किसी एक देश के नहीं हैं, बुद्ध सबको जोड़ते हैं। पीएम मोदी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध का उनके जीवन में विशेष स्थान रहा है। सरकारी दायित्वों से पहले भी वे बौद्ध तीर्थस्थलों का भ्रमण करते रहे हैं। लुंबिनी, जापान, चीन और मंगोलिया के अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हर जगह उन्होंने लोगों की आंखों में बुद्ध के प्रति गहरा जुड़ाव देखा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत जहां भी जाता है, केवल कूटनीति और राजनीति के जरिए नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म के माध्यम से भी दुनिया से जुड़ता है। भगवान बुद्ध की साझा विरासत इसका जीवंत प्रमाण है कि भारत आज भी उनकी परंपरा का वाहक है।
क्या हैं पिपरहवा अवशेष
पिपरहवा अवशेष भगवान बुद्ध से जुड़ी अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक धरोहर हैं। ये उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिले थे। मान्यता है कि इनमें भगवान बुद्ध की अस्थियां (धातु अवशेष) और उनसे जुड़ी प्राचीन वस्तुएं शामिल हैं, जिन्हें उनके महापरिनिर्वाण के बाद अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया गया था। 125 वर्षों बाद इन अवशेषों की भारत वापसी को न केवल ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक पुनर्स्थापना के रूप में भी देखा जा रहा है।

