नारायणगढ़। आर्य समाज के 152वें स्थापना दिवस एवं चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के पावन अवसर पर डीएवी स्कूल, नारायणगढ़ में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. आर.पी. राठी ने विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए आर्य समाज के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई, जिसमें नर्सरी से सातवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रार्थना सभा के अंतर्गत आयोजित शिविर में छात्रों को आर्य समाज के इतिहास, उद्देश्यों और समाज सुधार में उसके योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
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आर्य समाज के सिद्धांतों पर चलने का आह्वान
अपने संबोधन में प्रधानाचार्य डॉ. राठी ने कहा कि आर्य समाज ने भारतीय समाज में शिक्षा, सामाजिक सुधार और नैतिक मूल्यों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने “वेदों की ओर लौटो” के संदेश के साथ की थी, जिसका उद्देश्य समाज को अंधविश्वास, कुरीतियों और भेदभाव से मुक्त कर सत्य, ज्ञान और समानता की दिशा में अग्रसर करना था। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के समय में भी महर्षि दयानंद सरस्वती के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं और यदि युवा पीढ़ी उनके बताए मार्ग पर चले तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
शिक्षा के क्षेत्र में आर्य समाज का योगदान
डॉ. राठी ने आगे कहा कि आर्य समाज का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इसने न केवल गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित किया, बल्कि आधुनिक शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने का कार्य भी किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज की शिक्षा प्रणाली में भी आर्य समाज की विचारधारा और संस्कारों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अच्छे संस्कार अपनाने, अनुशासन का पालन करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया गया।
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सकारात्मक बदलाव का संकल्प
प्रधानाचार्य ने सभी से अपील की कि इस पावन अवसर पर वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लें और समाज की उन्नति में अपना योगदान दें। इस अवसर पर विद्यालय के सभी कोऑर्डिनेटर और शिक्षकगण उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय परिसर में पूरे आयोजन के दौरान उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर आर्य समाज के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया, जिससे यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

