प्रयागराज । प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अचानक मेला क्षेत्र छोड़कर चले जाने की खबर ने संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच चर्चाओं को तेज कर दिया है। उनके इस फैसले के बाद धार्मिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, उनके शिष्यों और आश्रम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से जुड़ा हुआ है।
माघ मेले में विशेष भूमिका
माघ मेला हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु संगम तट पर स्नान, साधना और सत्संग के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मौजूदगी को बेहद अहम माना जा रहा था। वे न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो रहे थे, बल्कि सनातन धर्म, गौ संरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार भी व्यक्त कर रहे थे।
अचानक प्रस्थान से बढ़ी हलचल
जानकारी के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघ मेले के बीच में ही प्रयागराज से प्रस्थान किया। उनके जाने की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं और संतों के बीच हलचल मच गई। कई लोगों ने इसे किसी बड़े घटनाक्रम से जोड़कर देखा, जबकि कुछ ने इसे धार्मिक रणनीति या आगामी कार्यक्रमों से जोड़कर आंका।
आश्रम का पक्ष
शंकराचार्य से जुड़े आश्रम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उनका माघ मेला छोड़ना किसी विवाद या असहमति का परिणाम नहीं है। आश्रम सूत्रों के मुताबिक, उन्हें देश के अन्य हिस्सों में पहले से तय धार्मिक कार्यक्रमों और प्रवचनों में भाग लेना था, जिसके चलते उन्हें समय से पहले प्रयागराज छोड़ना पड़ा।

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स्वास्थ्य और व्यस्त कार्यक्रम
सूत्रों का यह भी कहना है कि लगातार यात्राओं और कार्यक्रमों के कारण उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया। माघ मेला जैसे बड़े आयोजन में लगातार लोगों से मुलाकात, प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से शारीरिक थकान स्वाभाविक है।
संत समाज की प्रतिक्रिया
संत समाज की ओर से इस घटनाक्रम पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ संतों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया, जबकि कुछ का मानना है कि अविमुक्तेश्वरानंद जैसे प्रभावशाली संत की मौजूदगी माघ मेले की गरिमा को और बढ़ाती है। उनके अचानक चले जाने से श्रद्धालुओं में निराशा भी देखी गई।
पहले भी रहे हैं सुर्खियों में
यह पहली बार नहीं है जब अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे गौहत्या, धर्मांतरण और सनातन परंपराओं से जुड़े मुद्दों पर अपने बेबाक बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। उनके विचारों का एक बड़ा वर्ग समर्थन करता है, तो वहीं आलोचक भी समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं।
श्रद्धालुओं की भावनाएं
माघ मेले में पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे विशेष रूप से शंकराचार्य के दर्शन और प्रवचन सुनने आए थे। उनके अचानक प्रस्थान से कुछ श्रद्धालु मायूस नजर आए, लेकिन अधिकतर लोगों ने इसे संतों की दिनचर्या और दायित्वों से जुड़ा सामान्य निर्णय बताया।
आगे की गतिविधियों पर नजर
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के माघ मेला छोड़ने के बाद अब सबकी नजर उनके आगामी कार्यक्रमों पर टिकी है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही अन्य धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
फिलहाल अटकलों का दौर
हालांकि आश्रम और उनके करीबी लोग सभी तरह की अटकलों को खारिज कर चुके हैं, लेकिन माघ मेला छोड़ने का समय और तरीका अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में उनके बयान या कार्यक्रम इन चर्चाओं पर विराम लगा सकते हैं।
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