नई दिल्ली।
पूर्णिमा हिंदू पंचांग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में आकाश में विराजमान होता है। यह तिथि न केवल धार्मिक दृष्टि से विशेष मानी जाती है, बल्कि आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसका अपना अलग महत्व है। देशभर में आज पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों, तीर्थस्थलों और नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लोग स्नान, दान, पूजा-पाठ और व्रत के माध्यम से पुण्य अर्जित करने की कामना कर रहे हैं।
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हिंदू धर्म में पूर्णिमा को शुभ तिथि माना गया है। इस दिन गंगा, यमुना, सरस्वती और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान और दान कई गुना फलदायी होता है। इसी कारण हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, उज्जैन और नासिक जैसे तीर्थस्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। कई स्थानों पर प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पूर्णिमा के साथ कई प्रमुख पर्व और व्रत भी जुड़े हुए हैं। बुद्ध पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली पूर्णिमा जैसे पर्व इसी तिथि पर मनाए जाते हैं। प्रत्येक पूर्णिमा का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। उदाहरण के तौर पर शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों को अमृत समान माना जाता है, जबकि गुरु पूर्णिमा पर गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया जाता है। इसी तरह कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में भी पूर्णिमा का विशेष स्थान है। इस दिन चंद्रमा अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है और इसका असर मानव मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति पर पड़ता है। ज्योतिषियों के अनुसार पूर्णिमा के दिन ध्यान, साधना और मंत्र जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। कई लोग इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और हवन भी कराते हैं, ताकि जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहे।
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पूर्णिमा का वैज्ञानिक पक्ष भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा का पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव इस दिन सबसे अधिक होता है, जिसका असर समुद्र की ज्वार-भाटा प्रक्रिया के साथ-साथ मानव शरीर पर भी पड़ता है, क्योंकि मानव शरीर में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। इसी कारण कुछ लोग पूर्णिमा के दिन भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील महसूस करते हैं। योग और आयुर्वेद में भी इस तिथि को विशेष माना गया है और संतुलित आहार तथा ध्यान की सलाह दी जाती है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पूर्णिमा के अवसर पर धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी देखने को मिलती हैं। कई जगहों पर भजन-कीर्तन, सत्संग और कथा का आयोजन किया जाता है। परिवार के लोग एकत्र होकर पूजा-पाठ करते हैं और जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य अर्जित करते हैं। सामाजिक रूप से भी यह दिन आपसी सौहार्द और सेवा भाव को बढ़ावा देने वाला माना जाता है।
कुल मिलाकर, पूर्णिमा न केवल एक तिथि है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दिन आत्मचिंतन, सेवा, साधना और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। बदलते समय के साथ भी पूर्णिमा की आस्था और महत्व लोगों के जीवन में बना हुआ है, और आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन तिथि को श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते नजर आते हैं।

