बेंगलुरु।
रियल एस्टेट सेक्टर की जानी-मानी कंपनी कॉन्फिडेंट ग्रुप के चेयरमैन की मौत की खबर से उद्योग जगत में सनसनी फैल गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार चेयरमैन का निधन गोली लगने से हुआ है, जिसे पुलिस प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला मानकर जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस अप्रत्याशित घटना से कंपनी के कर्मचारियों, व्यापारिक साझेदारों और रियल एस्टेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना चेयरमैन के निजी आवास या कार्यालय से जुड़ी बताई जा रही है, जहां से हथियार बरामद होने की सूचना है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और परिजनों के बयान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं—व्यक्तिगत, पेशेवर और मानसिक दबाव—को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की आशंका को पूरी तरह परखा जा सके।
कॉन्फिडेंट ग्रुप दक्षिण भारत में रियल एस्टेट के क्षेत्र में एक स्थापित नाम रहा है। कंपनी ने आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के जरिए बाजार में पहचान बनाई थी। चेयरमैन के नेतृत्व में समूह ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे किए और रोजगार के अवसर सृजित किए। ऐसे में उनके अचानक निधन की खबर ने निवेशकों और ग्राहकों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। कंपनी प्रबंधन की ओर से जारी शोक संदेश में कहा गया है कि यह संगठन के लिए अपूरणीय क्षति है और कठिन समय में परिवार के साथ खड़ा है।
परिजनों और करीबी सहयोगियों ने चेयरमैन को एक दूरदर्शी उद्यमी बताया है। हालांकि, हाल के महीनों में व्यवसायिक दबाव, बाजार की चुनौतियां और निजी कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या घटना से पहले किसी तरह का तनाव, वित्तीय विवाद या अन्य कारण मौजूद थे। मोबाइल फोन, दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
घटना के बाद कंपनी के शेयरधारकों और कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति देखी गई। प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि सभी परियोजनाएं निर्धारित योजना के अनुसार जारी रहेंगी और संचालन पर कोई तत्काल असर नहीं पड़ेगा। वहीं, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और समय पर जानकारी देना जरूरी होता है, ताकि अफवाहों पर रोक लग सके और हितधारकों का भरोसा बना रहे।
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पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अफवाह या अपुष्ट जानकारी साझा न करें। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर पुलिस आधिकारिक बयान जारी कर सकती है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि सफलता और जिम्मेदारियों के साथ मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करना और समय पर सहायता लेना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति तनाव, अवसाद या संकट से जूझ रहा हो, तो परिवार, मित्रों या पेशेवरों से मदद लेना महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर नजदीकी हेल्पलाइन या काउंसलिंग सेवाओं से संपर्क किया जा सकता है।

