कोलकाता। Supreme Court में पश्चिम बंगाल के SIR (Special Intensive Revision) मामले को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा है कि 2022 की वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए। ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच तीखी बहस चल रही है। इस मुद्दे को लोकतंत्र और मताधिकार से जोड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस ने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताया है।
मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court में यह सवाल उठा कि SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट में बदलाव किस आधार पर किया जा सकता है और क्या इससे किसी पात्र मतदाता के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि वोटर लिस्ट में मनमाने तरीके से नाम हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे लोगों का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि 2022 की वोटर लिस्ट पहले से सत्यापित है, ऐसे में बिना ठोस वजह किसी का नाम हटाना अनुचित होगा।
Also Read: IND vs AFG U19: भारत अंडर-19 ने अफगानिस्तान को दी कड़ी चुनौती
Supreme Court में पश्चिम बंगाल के SIR केस के दौरान 2022 की वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मुद्दे पर बहस हुई, जिस पर ममता बनर्जी ने स्पष्ट रुख अपनाया।
इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार, तृणमूल कांग्रेस, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी और मतदाता सीधे तौर पर प्रभावित हैं। ममता बनर्जी ने राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।
यह मामला हाल ही में Supreme Court में सुनवाई के दौरान चर्चा में आया, जब वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर याचिकाएं और आपत्तियां सामने आईं।
मामला Supreme Court में सुना जा रहा है, जबकि इसका सीधा असर पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची और आगामी चुनावों पर पड़ेगा।
वोटर लिस्ट में नाम हटने से योग्य मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि इससे चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे।
SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जाता है, लेकिन ममता बनर्जी ने मांग की है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी मतदाता का नाम बिना ठोस कारण के न हटाया जाए।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार हमेशा से समावेशी लोकतंत्र में विश्वास करती है और हर योग्य नागरिक को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के नाम पर कुछ ताकतें राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार देते हुए कहा कि राज्य सरकार हर स्तर पर इसका विरोध करेगी।
वहीं, इस मामले में विपक्षी दलों का कहना है कि वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण जरूरी है ताकि फर्जी या डुप्लिकेट नाम हटाए जा सकें। हालांकि तृणमूल कांग्रेस का तर्क है कि फर्जी नाम हटाने के नाम पर असल मतदाताओं को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। इसी संतुलन को लेकर Supreme Court में कानूनी बहस जारी है।
Also Read: Food Delivery Graveyard Video: वायरल वीडियो ने खोली फूड डिलीवरी की कड़वी सच्चाई
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि Supreme Court का रुख इस मामले में बेहद अहम होगा, क्योंकि इसका असर सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों में होने वाले वोटर लिस्ट रिवीजन पर भी पड़ सकता है। यदि अदालत 2022 की वोटर लिस्ट को आधार मानती है, तो इससे लाखों मतदाताओं को राहत मिल सकती है।
Supreme Court Bengal SIR Case लोकतंत्र, मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला बन गया है। ममता बनर्जी का स्पष्ट संदेश है कि एक भी योग्य वोटर का नाम नहीं हटना चाहिए, और अब सभी की निगाहें Supreme Court के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले चुनावी माहौल की दिशा तय कर सकता है।

