उत्तर भारत में इस साल मार्च का मौसम काफी असामान्य नजर आ रहा है। आमतौर पर इस महीने तापमान बढ़ने लगता है और सर्दी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है, लेकिन इस बार लोगों को जैकेट पहनने पर मजबूर होना पड़ा। राजधानी दिल्ली और आसपास के राज्यों में पिछले कुछ घंटों से मौसम पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ Western Disturbance की वजह से हो रहा है, जो इस समय क्षेत्र के पास से गुजर रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ, भूमध्य सागर से उत्पन्न होने वाले मौसमी सिस्टम हैं, जो शीतकाल में भारत में बारिश और कभी-कभी तूफानी हालात ला सकते हैं। इस बार का सिस्टम दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ में मध्यम से भारी बारिश और बर्फबारी लेकर आया है। इसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भी बर्फबारी हो रही है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप के मुताबिक, अगले 6-8 घंटे महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इस सिस्टम के प्रभाव के दौरान इन राज्यों में मौसम गतिविधियां बढ़ी हुई रहेंगी।
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इस असामान्य मौसम के चलते सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें भी फैल गई हैं। कुछ वायरल पोस्ट्स में दावा किया गया कि यह बारिश और तूफानी मौसम कृत्रिम रूप से उत्पन्न किया गया है और इसके पीछे बिल गेट्स जैसे नामों को जोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञ इसे पूरी तरह मिथक और भ्रामक बताते हैं।
वास्तव में, इन दावों का आधार है क्लाउड सीडिंग (cloud seeding) जैसी तकनीक। क्लाउड सीडिंग में बादलों में सिल्वर आयोडाइड या नमक जैसी चीजें छिड़ककर बारिश को बढ़ावा देने की कोशिश की जाती है। यह तकनीक अक्सर सूखे या बारिश कम होने वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल की जाती है। लेकिन इसके प्रभाव सीमित होते हैं और यह बड़े पैमाने पर मौसम को नियंत्रित नहीं कर सकती। यानी, किसी भी व्यक्ति, चाहे वह बिल गेट्स हों या कोई अन्य, इस तरह के बड़े पैमाने पर मौसम परिवर्तन का जिम्मेदार नहीं हो सकता।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की असामान्य गतिविधियों के पीछे सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन (climate change) है। वैश्विक गर्मी बढ़ने के कारण हवा में नमी अधिक हो जाती है, जिससे अचानक और असामान्य मात्रा में बारिश और तूफान जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में मार्च में असामान्य बारिश के कई उदाहरण देखने को मिले हैं, और यह अब सामान्य मौसम पैटर्न से बाहर की घटना नहीं रह गई है।
अत्यधिक बारिश और तूफानी मौसम से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है कि यदि आप इन राज्यों में हैं तो अगले कुछ घंटों तक घर से बाहर जाते समय सावधानी बरतें। सड़कें गीली और फिसलन भरी हो सकती हैं, और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण यात्रा प्रभावित हो सकती है।
राजधानी दिल्ली में बारिश और तूफानी हवाओं ने तापमान में अचानक गिरावट ला दी है। आमतौर पर मार्च में दिन के समय तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, लेकिन इस बार ठंड के कारण लोग सुबह और शाम जैकेट पहनते नजर आ रहे हैं। इस असामान्य मौसम को देखकर कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे ‘मिनी मानसून’ कहा है।
वहीं, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इस मौसम से जुड़ी अफवाहें फैलाने से जनता में भ्रम और डर फैलता है। विज्ञान और मौसम विज्ञान की समझ को नजरअंदाज करके किसी एक व्यक्ति को दोषी ठहराना गलत है। असल में, यह केवल प्राकृतिक मौसम प्रणाली और जलवायु परिवर्तन का परिणाम है।
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कुल मिलाकर, मार्च 2026 का यह मौसम उत्तर भारत के लिए असामान्य जरूर है, लेकिन इसे लेकर किसी व्यक्ति या तकनीक को दोष देना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गलत है। पश्चिमी विक्षोभ और मौसमी सिस्टम के कारण बारिश और ठंड बनी हुई है। लोगों को चाहिए कि वे मौसम विभाग की चेतावनी और अपडेट पर ध्यान दें और अफवाहों पर भरोसा न करें। जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसे असामान्य मौसम की घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं, इसलिए सतर्कता और तैयारी ही बेहतर उपाय हैं।
उत्तर भारत में मार्च का ‘मिनी मानसून’ जैकेट वाले दिन लेकर आया है। पश्चिमी विक्षोभ और मौसमी सिस्टम इसके मुख्य कारण हैं। बिल गेट्स या किसी अन्य व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक मौसम चक्र का परिणाम है, जिसे समझकर ही सुरक्षित और सही तरीके से मौसम का सामना किया जा सकता है।

