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AAP में बगावत से पंजाब की सियासत गरम, CM मान राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात, 7 सांसदों पर राइट टू रिकॉल की तैयारी

चंडीगढ़/नई दिल्ली।
पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर उठे बगावती तूफान ने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे और दल बदल के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का समय मांगा है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री अपने सभी विधायकों के साथ दिल्ली जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और दलबदल करने वाले सांसदों के खिलाफ ‘राइट टू रिकॉल’ की मांग रखेंगे।

AAP का पलटवार, सदस्यता रद्द कराने की तैयारी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पार्टी की ओर से सख्त रुख अपनाया गया है। AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर दलबदल करने वाले सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे। वहीं पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा का कहना है कि केवल 3 सांसद ही भाजपा में शामिल हुए हैं, बाकी अभी भी तकनीकी रूप से AAP का हिस्सा हैं।

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कितने सांसद गए, आंकड़ों पर विवाद

AAP और बागी नेताओं के बीच सबसे बड़ा विवाद संख्या को लेकर है। एक ओर राघव चड्ढा का दावा है कि 7 सांसद उनके साथ हैं, जिससे दलबदल कानून लागू नहीं होता। वहीं AAP का कहना है कि कुछ सांसदों के हस्ताक्षर फर्जी हैं और वास्तविक संख्या कम है।

BJP में शामिल हुए नेता

पार्टी छोड़ने के बाद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भाजपा का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।

CM मान का तंज और आरोप

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर बागी सांसदों पर तंज कसते हुए लिखा कि “कुछ चीजें मिलकर स्वाद तो बना सकती हैं, लेकिन खुद व्यंजन नहीं बन सकतीं।” उन्होंने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने का आरोप भी लगाया और कहा कि सांसदों ने पंजाब के लोगों के विश्वास के साथ धोखा किया है।

AAP में बढ़ी हलचल

घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। AAP के शीर्ष नेतृत्व में लगातार बैठकों का दौर जारी है। मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा की। इसके अलावा पंजाब सरकार के मंत्री भी दिल्ली पहुंचकर रणनीति तय करने में जुटे हैं।

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बगावत की वजहें भी आईं सामने

सूत्रों के अनुसार, पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की नाराजगी लंबे समय से चल रही थी।

  • राघव चड्ढा संगठन में अपनी भूमिका कम होने से नाराज थे।
  • संदीप पाठक को अहम फैसलों से दूर रखा जा रहा था।
  • स्वाति मालीवाल का शीर्ष नेतृत्व से विवाद चल रहा था।
  • अशोक मित्तल को ईडी कार्रवाई के दौरान समर्थन न मिलने की शिकायत थी।
  • हरभजन सिंह और अन्य नेताओं ने भी पार्टी में तवज्जो न मिलने को वजह बताया।

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