नई दिल्ली:
NEET UG 2026 देने जा रहे छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। National Testing Agency ने साफ किया है कि अगर NEET Biometric वेरिफिकेशन किसी कारण से फेल हो जाता है, तब भी छात्रों को परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा।
बायोमेट्रिक फेल होने पर क्या करना होगा?
एनटीए के नए निर्देश के अनुसार—
- अगर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पूरा नहीं होता है
- तो छात्र को परीक्षा केंद्र पर सेल्फ डिक्लेरेशन (अंडरटेकिंग) फॉर्म भरना होगा
- यह फॉर्म सेंटर पर ही उपलब्ध रहेगा
- फॉर्म जमा करने के बाद छात्र को एग्जाम हॉल में एंट्री मिल जाएगी
क्यों लिया गया यह फैसला ?
एक्सपर्ट्स के अनुसार बायोमेट्रिक प्रक्रिया में कई बार तकनीकी दिक्कतें आ जाती हैं, जैसे—
- मशीन खराब होना
- इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या
- फिंगरप्रिंट मैच न होना
ऐसी स्थिति में पहले छात्रों को तनाव का सामना करना पड़ता था। अब इस फैसले से उनका साल खराब होने का खतरा कम हो जाएगा।
एग्जाम टाइम के दौरान नहीं होगा वेरिफिकेशन
एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा के दौरान किसी भी तरह का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं किया जाएगा। इससे छात्र बिना बाधा के शांतिपूर्वक परीक्षा दे सकेंगे।
कितने छात्रों ने किया रजिस्ट्रेशन?
इस साल NEET-UG 2026 के लिए देशभर से करीब 22.5 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिससे यह देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक बन गई है।
पेपर पैटर्न क्या रहेगा?
- कुल प्रश्न: 180
- समय: 180 मिनट
- बायोलॉजी: 90 प्रश्न
- फिजिक्स: 45 प्रश्न
- केमिस्ट्री: 45 प्रश्न
हर प्रश्न के समान अंक होते हैं, इसलिए अधिक से अधिक सही सवाल हल करना जरूरी है।
स्टूडेंट्स के लिए सलाह
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेपर के लेवल से घबराने की जरूरत नहीं है। चयन प्रक्रिया परसेंटाइल के आधार पर होती है, इसलिए कठिन या आसान पेपर से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
NEET 2026 से पहले NTA का यह फैसला लाखों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है। अब तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होगा और सभी को परीक्षा देने का समान मौका मिलेगा।



