कैथल | Gyan Bharatam Mission के अंतर्गत जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) सुशील कुमार ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिले में चल रहे National Manuscript Survey को 10 जून तक हर हाल में पूरा किया जाए। यह निर्देश जिला प्रशासन (https://kaithal.gov.in/divisions/district-administration/) की एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दिए गए।
Gyan Bharatam Mission के तहत डिजिटल होगा इतिहास
बैठक को संबोधित करते हुए ADC ने स्पष्ट किया कि इस मिशन के तहत 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों और महत्वपूर्ण अभिलेखीय दस्तावेजों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इन दुर्लभ ग्रंथों को न केवल सहेजा जाएगा, बल्कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर Gyan Bharatam Mission पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य भारत की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुचाना है।
SDM के नेतृत्व में उपमंडल स्तर पर टीमें गठित
सर्वेक्षण कार्य में तेजी लाने के लिए ADC ने जिले के सभी एसडीएम (SDM) को अपने-अपने क्षेत्रों में नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि:
- उपमंडल स्तर पर विशेष टीमों का गठन कर पांडुलिपियों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) और मैपिंग सुनिश्चित की जाए।
- अधिकारी आपसी तालमेल के साथ कार्य करें ताकि कोई भी प्राचीन दस्तावेज छूट न जाए।
हर घर दस्तक’ अभियान से जुटेगी जनता
प्रशासन इस सर्वेक्षण को जन-आंदोलन बनाने के लिए ‘हर घर दस्तक’ अभियान भी चला रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीणों और शहरी निवासियों को अपनी प्राचीन धरोहरों की जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही ‘अभिलेख दान’ अभियान के जरिए लोग स्वेच्छा से पुराने पत्र, मानचित्र और दुर्लभ तस्वीरें विभाग को सौंप सकते हैं ताकि उन्हें वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जा सके।
कैसे करें पंजीकरण ?
नागरिक स्वयं भी Gyan Bharatam मोबाइल ऐप के जरिए अपने पास मौजूद पांडुलिपियों की जानकारी अपलोड कर सकते हैं। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि इस प्रक्रिया के दौरान मूल दस्तावेज मालिकों के पास ही सुरक्षित रहेंगे, केवल उनका डिजिटल डेटा संग्रहित किया जाएगा।
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कैथल अपनी ऐतिहासिक समृद्धि के लिए जाना जाता है। ऐसे में यह पहल जिले की छिपी हुई सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
– अंतिम तिथि: 10 जून तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य।
– पात्रता: 75 साल या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियाँ।
– तकनीक: डेटा को डिजिटल लाइब्रेरी के रूप में किया जाएगा सुरक्षित।

