Mary Millben जोकि एक जानी-मानी Hollywood Singer हैं, उन्होंने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी के विरोधी कुछ अमेरिकी डोनर्स CJP को आर्थिक मदद दे रहे हैं। इस वजह से उनके और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक Abhijit Dipke के बीच विदेशी हस्तक्षेप और कथित फंडिंग को लेकर विवाद दिन ब दिन अलग ही मोड़ लेते जा रहा है। Millben का दावा है कि अमेरिकी डोनर्स द्वारा किए जा रहे फंडिंग का इस्तेमाल भारत में राजनीतिक उथल-पुथल मचाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए अभी तक कोई ठोस वित्तीय प्रमाण से संबंधित कोई सार्वजनिक रिपोर्ट हमारे सामने नहीं आया है।
Abhijit Dipke ने उठाए विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल
Mary Millben के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए Abhijit Dipke ने भारतीय राजनीति में विदेशी नागरिकों की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। Dipke का कहना है कि विदेशी नागरिकों को ये हक किसने दिया कि वो भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर सकें। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा है कि उन्हें अपने ही देश के नागरिकों को बदनाम करने के लिए बाहरी लोगों के समर्थन की जरूरत क्यूँ पड़ रही है?
Rahul Gandhi और Elon Musk का मामला क्यों अहम?
अब सवाल ये उठता है कि उपरोक्त विवाद पर Rahul Gandhi द्वारा Elon Musk को दिया जाने वाला समर्थन कहाँ तक उचित है? अगर ये उचित है तो क्या किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा दिए गए बयान को भारत के अंदरूनी मामलों में किए जाने वाले हस्तक्षेप की संज्ञा दी जा सकती है?
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सबूत जरूरी
प्रजातंत्र में कभी भी राजनीतिक आलोचना, सार्वजनिक बहस और विदेशी नागरिकों की टिप्पणियों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। यदि किसी भी जाने-माने संगठन को कहीं से विदेशी धन मिलने का आरोप लगाया जाता है तो उसकी जांच दस्तावेजों और वित्तीय प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए।
Mary Millbenऔर Abhijit Dipke के बीच जारी विवाद ने लोगों के सामने एक यहां सवाल खड़ा किया है कि क्या विदेशी हस्तक्षेप का विरोध राजनीतिक विचारधारा देखकर किया जाना चाहिए या सभी के लिए एक से नियम लागू किये जाने चाहिए? इस सवाल का जवाब आरोप-प्रत्यारोपों से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, प्रमाण और एक समान कसौटी से तय होना चाहिए।
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