टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क के पिता एरोल मस्क एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। एक हालिया इंटरव्यू में एरोल मस्क ने दावा किया कि अगर अगले दो दशकों में अमेरिका में श्वेत आबादी अल्पसंख्यक हो जाती है तो देश “ढह जाएगा।” उन्होंने इस संभावित जनसांख्यिकीय बदलाव को “बेहद बुरी बात” करार दिया और इसके दूरगामी परिणामों को लेकर चिंता जताई।
एरोल मस्क ने सवालिया लहजे में कहा, “क्या आप अमेरिका को गिरते देखना चाहते हैं? क्यों? क्या आपको इलेक्ट्रिक कारें और तकनीक पसंद नहीं हैं? क्या आप फिर से जंगल के युग में लौटना चाहते हैं?” उनके इस बयान ने नस्ल, पहचान और भविष्य की राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
इंटरव्यू में एरोल मस्क ने दक्षिण अफ्रीका का भी जिक्र करते हुए कहा कि वहां की “छोटी श्वेत आबादी, जो यूरोपीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है,” ने अश्वेत अफ्रीकी आबादी के विकास और प्रगति में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में व्यवस्था-जनित उत्पीड़न (सिस्टमिक ओप्रेशन) की अवधारणा को “बकवास” बताते हुए खारिज कर दिया।
एरोल मस्क के इन बयानों पर एलन मस्क की ओर से कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों के बीच रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। एलन मस्क पहले सार्वजनिक रूप से अपने पिता की कड़ी आलोचना कर चुके हैं। एक पुराने इंटरव्यू में एलन मस्क ने एरोल को “बेहद भयानक इंसान” बताते हुए कहा था कि वह “बुराई की योजना बनाता है।”
एलन मस्क का कहना रहा है कि उनके पिता पर कई गंभीर आरोप रहे हैं और उनके शब्दों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि रिश्ते सुधारने के लिए उन्होंने हर संभव कोशिश की—धमकी, इनाम, तर्क, भावनात्मक अपील—लेकिन हालात और बिगड़ते चले गए।
एरोल मस्क का नाम पहले भी कई विवादों में आ चुका है। 1998 में उन्होंने तीन लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की थी, हालांकि इसे उन्होंने आत्मरक्षा बताया और बाद में आरोप हटा लिए गए। इस घटना सहित कई मामलों ने उनकी छवि को विवादास्पद बनाए रखा है और यही कारण है कि एलन मस्क ने बार-बार अपने पिता से सार्वजनिक दूरी बनाई है।
एरोल मस्क के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिका समेत कई देशों में जनसांख्यिकीय बदलाव, प्रवासन और नस्लीय पहचान को लेकर तीखी बहस चल रही है। उनके बयान ने न केवल राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि एलन मस्क के पारिवारिक रिश्तों पर पड़ने वाली छाया को भी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

