अमृतसर।
पंजाब की सरबजीत कौर का भारत लौटना फिलहाल टल गया है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने भारत वापसी के लिए जरूरी विशेष यात्रा परमिट रोक दिया है, जिसके बाद उन्हें कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच लाहौर के दारुल अमान में स्थानांतरित कर दिया गया है। सरबजीत कौर को अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते भारत भेजा जाना था, लेकिन अंतिम समय पर अनुमति न मिलने से प्रक्रिया रुक गई।
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पंजाब प्रांत के गृह विभाग ने पुष्टि की है कि जब तक भारत जाने का परमिट जारी नहीं हो जाता, तब तक सरबजीत कौर दारुल अमान में ही रहेंगी। अधिकारियों का कहना है कि अगले सप्ताह तक परमिट मिलने की संभावना है। इस बीच 9 जनवरी 2026 को उनकी मेडिकल जांच करवाई गई, जिसमें उनकी सेहत सामान्य पाई गई है।
लाहौर हाईकोर्ट में मामले की पैरवी कर रहे वकील अली चंगेजी संधू के मुताबिक, सरबजीत कौर का केस अभी कानूनी प्रक्रिया में है। कोर्ट और संबंधित विभागों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें जल्द भारत भेजा जा सके।
सरबजीत कौर 4 नवंबर को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अमृतसर से अटारी बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान गई थीं। जत्था 10 दिन बाद भारत लौटा, लेकिन गिनती में एक श्रद्धालु कम निकला। जांच में सामने आया कि कपूरथला की सरबजीत कौर वापस नहीं आई थीं। उनका नाम न पाकिस्तान के एग्जिट रिकॉर्ड में था और न ही भारत के एंट्री रिकॉर्ड में।
पहले सरबजीत कौर को लापता माना गया, लेकिन बाद में उनका उर्दू में लिखा निकाहनामा वायरल हुआ। इसमें दावा किया गया कि उन्होंने पाकिस्तान में इस्लाम धर्म अपनाकर शेखुपुरा निवासी नूर हुसैन से निकाह कर लिया है। इसके बाद एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें सरबजीत ने कहा कि वह मुस्लिम बनना चाहती हैं और नासिर से प्यार करती हैं, जिसे वह पिछले 9 साल से जानती हैं।
सरबजीत कौर का मामला भारत और पाकिस्तान के बीच मानवीय आधार पर बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पाकिस्तान सरकार कब विशेष यात्रा परमिट जारी करती है, ताकि सरबजीत कौर अपने देश भारत लौट सकें।

