Tuesday, February 10, 2026

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Delhi Cloud Seeding Update – ₹3.21 Crore Kharch Hone Ke Baad Bhi Kyun Nahi Hui Baarish?

Delhi Cloud Seeding Update – दिल्ली में फिर से Cloud Seeding की चर्चा गरम है। ₹3.21 करोड़ खर्च हो गए, पर बारिश नहीं आई। अब सवाल ये कि आखिर क्यों नहीं हुई बारिश जब पूरा प्लान तैयार था? आप सोच रहे होंगे, इतनी बड़ी टेक्नॉलजी भी फेल कैसे हो गई? तो चलिए थोड़ा समझते हैं।

सबसे पहले, Cloud Seeding कोई जादू नहीं है। ये process में आसमान के बादलों को रासायनिक particles से उत्तेजित किया जाता है (जैसे silver iodide)। पर इसमें timing बहुत जरूरी होता है। अगर बादल सही density में नहीं हैं, तो सारा spray हवा में ही रह जाता है। और यही शायद दिल्ली में हुआ।

अब pollution और हवा की नमी, दोनों ने effect डाला। हवा सूखी थी और बादलों में नमी कम थी। इसलिए भी droplets नहीं बने। (ये वैसे है जैसे आप सूखी मिट्टी में पानी डालो, वो अंदर नहीं जाती।)

तो कहानी अभी खत्म नहीं हुई। लोग पूछ रहे हैं — अब अगला कदम क्या होगा?

Cloud Seeding Kya Hota Hai – Artificial Baarish Ka Science

क्लाउड सीडिंग या कृत्रिम बारिश एक ऐसा विज्ञान है जो बादलों से बारिश कराता है. सरल शब्दों में कहें तो – वैज्ञानिक बादलों में रसायन डालते हैं (जैसे सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या ड्राई आइस) ताकि पानी की बूंदें जल्दी बनें. जब ये कण बादल के अंदर जाते हैं, तो वो नाभिक की तरह काम करते हैं – और नमी उसके चारों तरफ इकट्ठी होती है, फिर बारिश गिरती है.​​

इस प्रक्रिया को विमान या रॉकेट से किया जा सकता है. कभी कभी जमीन से भी स्प्रे होता है. यह बारिश प्राकृतिक नहीं होती, पर शर्तें सही हों तभी काम करती है. अगर आर्द्रता कम हो, तो बारिश नहीं होती (सिर्फ बादल भारी दिखता है).​

भारत में इसे दिल्ली, महाराष्ट्र और UAE जैसे देश उपयोग करते हैं प्रदूषण या सूखा कम करने के लिए. आप इसे कृत्रिम बारिश कह सकते हैं – प्रकृति की प्रक्रिया को थोड़ा धक्का देते हैं, बस.

Delhi Mein Cloud Seeding Ka Idea Kaise Aaya

दिल्ली में अब Cloud Seeding की बात फिर से होने लगी है। हवा ज़हरीली है और सांस लेना तक भारी लगता है। लोग मास्क पहनकर निकलते हैं, फिर भी आंखों में जलन रहती है। तो सरकार अब आसमान से मदद मांग रही है—बारिश बुलाने के लिए। ये Idea कोई नया नहीं, पर अब वक्त ऐसा आ गया कि इसे फिर से आज़माना पड़ेगा।

Cloud Seeding का Idea कैसे आया

  • पहला कारण: दिल्ली की हवा नवंबर तक बहुत खराब हो जाती है। Crop burning, traffic और dust सब मिल जाते हैं। तो scientists ने कहा—बारिश से धूल दब जाएगी।
  • दूसरा कारण: ये तरीका पहले भी China, UAE जैसे देशों ने इस्तेमाल किया। दिल्ली ने भी 2018 में कोशिश की थी (थोड़ा काम किया)। अब फिर से वैसा करने की तैयारी है।
  • तीसरा कारण: IIT Kanpur की team ने फिर से Cloud Study की। उन्होंने कहा कि अगर cloud ठीक हों, तो artificial rain लाना संभव है।
  • चौथा कारण: लोग अब उम्मीद रख रहे हैं। क्योंकि purifier भी अब थक गए हैं, और हवा फिर भी साफ नहीं हो रही।
Cloud Seeding Kya Hota Hai – Artificial Baarish Ka Science

Pollution Aur Smog Kam Karne Ki Koshish – Main Uddeshya Kya Tha

दिल्ली में इस बार सर्दियों से पहले ही हवा भारी हो गई थी। धुआँ, धूल और बदबू से सांस लेना मुश्किल था। तो सरकार ने Cloud Seeding करने की कोशिश की। ये कोई जादू नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीका है जिससे बादलों से कृत्रिम बारिश गिराई जाती है (ताकि हवा थोड़ी साफ हो जाए)। आपको समझना होगा कि इस प्रक्रिया का मुख्य मकसद साफ हवा लाना था, न कि सिर्फ बारिश दिखाना।

मुख्य उद्देश्य – Pollution और Smog कम करना

हवा से Dust हटाना
Cloud Seeding से जो बारिश होती है, वो हवा के Dust particles को नीचे गिरा देती है। इससे Visibility बढ़ती है और सांस लेना आसान होता है।

Air Quality सुधारना
इसका असर AQI पर पड़ता है। जैसे Light Rain से pollutant level नीचे आता है और हवा थोड़ी fresh लगती है।

दिल्ली के जलवायु शोध को बढ़ावा देना
ऐसा प्रयोग दिखाता है कि भविष्य में Pollution Control के लिए अब Weather Engineering भी काम आ सकता है (थोड़ा नया रास्ता है, पर ज़रूरी है)।

IIT Kanpur Ki Team Ne Kaise Kiya Cloud Seeding Ka Plan

यह खबर आपको समझाती है कि IIT Kanpur की टीम ने कैसे बादलों से बारिश करवाने के लिए Cloud Seeding का प्लान बनाया। ये कोई फिल्मी आइडिया नहीं, बल्कि एक असली वैज्ञानिक तरीका है। यहाँ टीम ने मौसम, रसायन और उड़ान – सबको एकसाथ मिलाया।

कैसे बना IIT Kanpur का Cloud Seeding प्लान

Step 1: बादलों का Study
पहले टीम ने Satellite Data और Doppler Radar से बादलों की Density जानी। देखा कौन से बादल में नमी है (जो बरसने लायक हो)।

Step 2: Aircraft और Chemical तैयार
फिर एक Special Aircraft में Silver Iodide और Sodium Chloride का Mixture रखा गया। ये Chemical बादल के अंदर Ice Crystal बनाने में मदद करता है।

Step 3: मौसम का सही Time चुना
ये काम ऐसे दिन किया गया जब Humidity ज़्यादा थी और Wind Speed कम। तब Cloud Seeding ज़्यादा असर दिखाता है (वैज्ञानिकों ने इसे perfect window कहा)।

Step 4: Test Flight और Monitoring
Aircraft ने Cloud Base पर उड़ान भरी और Spray किया। फिर टीम ने Ground Sensors और Radar से देखा कि कहाँ पर Rain Form हो रही है।

अब IIT Kanpur इस Experiment को बड़े Scale पर करने की तैयारी में है, ताकि Delhi-NCR जैसे Polluted Area में भी कृत्रिम बारिश हो सके।

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₹3.21 Crore Ka Budget – Kahan Aur Kaise Hua Kharch

दिल्ली की हवा फिर से संकट में है और इस बार सरकार ने बादलों पर दांव लगाया है। ₹3.21 करोड़ का Cloud Seeding Budget बना है, पर ये पैसा कहाँ और कैसे खर्च हुआ, यही बात सबको जाननी है। तो चलिए, इसे साधारण तरीके में समझते हैं (ताकि आप भी जान सको कि ये तकनीक सच में काम कर रही या बस कागज पर है)।

Cloud Seeding Budget का इस्तेमाल कैसे हुआ

  • Aircraft किराया और Fuel Cost: सबसे बड़ा हिस्सा यहीं गया। Seeding के लिए Special Aircraft दिल्ली और जयपुर से उड़ाए गए। हर Flight में Silver Iodide chemicals डाले गए।
  • Chemical Purchase: सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड खरीदे गए (इन्हें बादलों में छिड़क कर बारिश लाने की कोशिश होती है)।
  • Technical Expense: IIT Kanpur और Environment Ministry के Joint Project का डेटा collection और weather monitoring system पर खर्च हुआ।
  • Pilot Testing & Permission Process: DGCA और IMD के clearance के लिए कई बार delay हुआ, तो अतिरिक्त fund paperwork में गया।

अब सवाल है—क्या ये बारिश करवा पाई? थोड़ा हुआ, थोड़ा नहीं। लेकिन सीख यही है—cloud को control करना आसान नहीं, पर कोशिश जारी है।

Weather Conditions – Baarish Na Hone Ki Sabse Badi Wajah

यह कुछ दिन से दिल्ली में सबकी जुबान पर एक ही बात है — Artificial Baarish क्यूँ नहीं हो पा रही? हवा में धूल, धुआं, और गला जलाने वाली हवा। सब पूछ रहे हैं, “Rain kab hogi?” पर सच्चाई समझना ज़रूरी है। Artificial Baarish कोई switch नहीं है जो बस दबाया और बरसात हो गई।

Artificial Baarish ना होने की वजह

1. Clouds ka Na Hona
Artificial Rain तभी होती जब हवा में सही moisture वाले बादल हों। अगर clouds ही नहीं बने, तो chemical spray का असर zero हो जाता (जैसे खाली गिलास में पानी डालना)।

2. Wind Direction ka Issue
कभी हवा इतनी तेज़ चलती है कि plane से छिड़का गया chemical दूसरी दिशा में चला जाता। फिर benefit दिल्ली को नहीं, आसपास के जिलों को मिल जाता।

3. Cost aur Approval Delay
ये process सस्ता नहीं है। Cloud seeding plane, chemical, और pilot सब लगे रहते हैं। Government approval में delay होता है, तो plan रुक जाता है।

4. Temperature Mismatch
कभी हवा इतनी गर्म हो जाती है कि बादल बनने से पहले ही उड़ जाते हैं। ऐसा heat अब October 2025 में भी बना हुआ है।

कुल मिलाकर Delhi mai, Artificial Baarish ek tricky process है — nature के साथ cooperation चाहिए, सिर्फ technology से नहीं होता।

Clouds The Ya Nahi – Meteorological Department Ka Report

दिल्ली में इन दिनों बादल छाए रहते हैं, लेकिन बारिश फिर भी नहीं होती। लोग पूछते हैं – Clouds the ya nahi? मौसम विभाग का Report कुछ और ही कहानी बताता है। यह समय है ध्यान से समझने का, क्योंकि अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में हवा भारी और नम है, पर बारिश नहीं गिरती (जैसे कोई रोक रहा हो ऊपर से)।

Meteorological Department की रिपोर्ट

Cloud Seeding पर प्लान:
विभाग ने कहा है कि cloud seeding की तैयारी चल रही है। खासतौर पर उन इलाकों में जहाँ PM 2.5 का स्तर बहुत ऊपर जा चुका है।

दिल्ली की स्थिति:
हवा में नमी है और तापमान गिरता नहीं, इसीलिए बादल होते हुए भी बरसात नहीं होती। इसे “dry convection” कहा गया (मतलब बादल ऊपर उठते हैं पर पानी नहीं बनता)।

विज्ञानिक प्रक्रिया:
जब silver iodide के छोटे कण छोड़े जाते हैं, तब बादल पानी में बदलते हैं। यह तकनीक अगले हफ्ते इस्तेमाल की जा सकती है।

लोगों के लिए सलाह:
अगर आप बाहर निकलते हैं, तो मास्क जरूर पहनो। और बारिश की उम्मीद रखो – शायद इस बार artificial rain ही सही।

Delhi Government Ki Statement – “Effort Kiya, Result Nature Ke Haath Mein”

दिल्ली में पिछले हफ़्ते Cloud Seeding की कोशिश हुई, पर बारिश नहीं आई। अब Delhi Government ने कहा – “Effort किया, Result Nature के हाथ में।” ये लाइन सुनने में आसान लगती है, पर इसके पीछे पूरा science और system है। ये कोई simple spray वाला काम नहीं था, ये controlled experiment था (और बहुत महंगा भी)।

Department Report से क्या निकला

  • Environment Department ने बताया, cloud seed किया गया पर हवाओं की दिशा बदल गई।
  • Pilot report में लिखा, moisture थोड़ा कम था इसलिए condensation नहीं हुआ।
  • IIT Kanpur की technical team ने भी कहा – chemical release सही था, पर timing mismatch हो गया।
  • अब government दोबारा test plan कर रही है (mid-November के लिए कहा गया)।
  • Officials ने बताया, pollution कम नहीं हुआ पर experiment ने data दिया जो future में काम आएगा।

तो simple बात, कोशिश Delhi ने की, पर result still Nature decide करता है।

Cloud Seeding Kya Hota Hai – Artificial Baarish Ka Science

Experts Ka Analysis – Kya Cloud Seeding India Mein Work Kar Sakta Hai?

आज हम बात करेंगे एक ऐसे Science Topic की जो Delhi या North India की Pollution Problem में अक्सर सुनने को मिलती है — Cloud Seeding. ये Process basically हवा में Chemical Spray करना होता है ताकि Artificial Rain हो सके. लेकिन Experts कहते हैं कि India में ये हर जगह काम नहीं करता। क्यों? अब नीचे Report की तरह Breakdown देखो।

Cloud Seeding पर Government Department का Report

  • Weather Condition CheckCloud Seeding तभी Possible है जब Clouds already Moisture ले रहे हो (Dry Sky में कुछ नहीं होगा)।
  • IMD Expert OpinionIndian Meteorological Department के Scientists कहते हैं कि Humidity 60% से ऊपर हो तभी ये Effective होता है।
  • Cost Factor – एक Trial में करीब 70–80 Lakh तक खर्च होता है, वो भी Guarantee नहीं कि बारिश होगी।
  • Delhi NCR Issue – यहाँ Pollution Cloud Seed को Absorb कर लेता है (so rain drop बनना मुश्किल)।
  • Successful ExampleOctober में Maharashtra और Karnataka में कुछ Success दिखा, पर वही Formula Delhi में Fail हुआ।

Pehle Ke Examples – Dubai, China Aur US Mein Cloud Seeding Ka Result

दिल्ली में हाल का cloud seeding experiment थोड़ा निराशाजनक रहा। बादल तो बने लेकिन बारिश ठीक नहीं हुई। अब देखो, दूसरे देशों ने कैसे किया। उनका तरीका थोड़ा अलग था — और यही फर्क दिखता है। तो अब समझो नीचे दिए गए examples से कि फर्क कहाँ है और हमें आगे क्या सीखना चाहिए।

Dubai – Cloud ko Active Banana

  • Dubai में cloud seeding desert area में होता है।
  • Yahan high aircraft use होते हैं जो salt crystal फेंकते हैं।
  • हवा dry होती है, फिर भी system strong होने से बारिश होती है।
  • यह काम लगातार होता है, सिर्फ एक दिन का नहीं (Delhi में यही गलती थी)।

China – बड़े Scale पर प्रयोग

  • China ने Beijing Olympics से पहले किया था।
  • उन्होंने aerosol और silver iodide दोनों use किए।
  • Timing perfect रखी गई थी — बादल ready थे तभी seeding हुआ।
  • Government ने पूरा weather radar network लगाया (Delhi में monitoring कमजोर रही)।

US – लंबा Scientific Base

  • U.S. में cloud seeding decades से चल रहा है।
  • वहाँ data, satellite और wind pattern study पहले किया जाता है।
  • हर mission के बाद analysis report बनती है।
  • Delhi में ऐसा follow-up system नहीं है, जो जरूरी है अगर आप next बार success चाहते हो।

Future Plans – Kya Delhi Dobara Try Karegi Cloud Seeding?

यह विषय थोड़ा गंभीर है पर ज़रूरी भी। दिल्ली फिर से cloud seeding करने की सोच में है। पिछली बार थोड़ी राहत मिली थी, पर पूरा असर नहीं दिखा। अब सवाल है—क्या इस बार काम बनेगा? और क्यों फिर से इसे आज़माना चाहिए?

अगर दिल्ली फिर से cloud seeding करे

  • पहले तैयारी पक्की करो (जैसे मौसम वैज्ञानिक सही बादल पहचानें)।
  • फिर जहाज़ तैयार करो जो बादलों में silver iodide गिराए।
  • कोशिश करो कि हवा शांत हो और बादल कम से कम 2 घंटे तक टिके रहें।
  • इसके बाद शहर को कुछ समय दो, बारिश खुद बोलेगी।

क्यों फिर से करनी चाहिए ये कोशिश

  • हवा में ज़हर जैसा PM 2.5 बढ़ गया है, सांस लेना भी मुश्किल।
  • सर्दी आते ही smog की चादर फैल जाती है, और इससे राहत चाहिए।
  • मशीन वाला उपाय काम नहीं करता हमेशा, तो अब आसमान से उम्मीद करनी होगी।
  • अगर बारिश हुई, तो शहर थोड़ा साँस ले सकेगा (कम से कम कुछ दिन के लिए)।

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Environmental Concerns – Artificial Baarish Ka Ecosystem Par Asar

आज हम बात करेंगे Artificial Baarish यानी Cloud Seeding के असर के बारे में। ये तरीका अब Pollution Control और Drought Area में use किया जा रहा है। लेकिन इसका असर सिर्फ Rain नहीं, Environment पर भी गहरा पड़ता है। अगर आप सोच रहे हैं कि ये बारिश Nature वाली ही होती है, तो थोड़ा रुकिए। ये Process अलग है, और इसका Ecosystem पर impact भी अलग ही है।

1. मिट्टी और पेड़-पौधों पर असर

Artificial Baarish में रसायन जैसे Silver Iodide या Sodium Chloride use होते हैं। ये मिट्टी में जाते हैं और कुछ पौधों की जड़ों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। कई बार मिट्टी की natural balance बिगड़ जाती है (जैसे salt जमा होना शुरू हो जाए)।

2. जानवरों और पक्षियों पर असर

जब बादल से chemical mixed पानी गिरता है, तो पक्षी या जगह-जगह के जीव इसे पीते हैं। इससे उनकी health पर असर होता है। कुछ छोटे कीड़े या aquatic life मर भी सकते हैं।

3. हवा और Weather Pattern पर असर

Cloud Seeding से एक जगह की बारिश बढ़ सकती है, लेकिन दूसरी जगह का मौसम बदल सकता है। Nature में balance खिसक जाता है। धीरे-धीरे local हवा और moisture pattern permanent रूप से बदल सकता है।

4. Pollution Control का फायदा (लेकिन खतरा भी)

हाँ, इससे Dust और Smog नीचे बैठ जाते हैं, जिससे हवा साफ लगती है। पर उसी के साथ chemical कण जमीन पर बस जाते हैं। मतलब साफ हवा, लेकिन गंदी मिट्टी।

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