हरारे। जिम्बाब्वे के युवा बल्लेबाज Dion Myers ने कहा है कि क्रिकेट से लिया गया उनका दो साल का ब्रेक उनके करियर के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ। 22 वर्षीय मायर्स ने यूके में अपनी पढ़ाई के लिए क्रिकेट से दूरी बनाई थी और इसी दौरान उन्होंने खुद को दोबारा समझा, अपने खेल का नए नज़रिए से विश्लेषण किया और मानसिक रूप से भी खुद को मज़बूत किया।
भारत के खिलाफ हरारे में खेले गए तीसरे टी20 मैच में मायर्स ने नाबाद 65 रन की शानदार पारी खेलकर टीम की लड़खड़ाती पारी को संभाला और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी दमदार वापसी का ऐलान किया।
ब्रेक ने दिया नया दृष्टिकोण
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायर्स ने कहा, पिछले कुछ साल मेरे लिए आत्मचिंतन के रहे। मैंने सोचा कि पिछली बार मैं कहां अच्छा था और कहां बेहतर कर सकता हूं। क्रिकेट को बाहर से देखने का एक अलगी मजा है आप पूरे खेल को एक पैनोरामिक व्यू से देख पाते हो। मुझे लगा कि थोड़ी दूरी ने मुझे मैच्योर बनाया, मुझे अपनी कमियों और खूबियों को समझने का समय मिला। सच में, मेरे लिए यह ब्लेसिंग इन डिसगाइज था।
अंडर-19 कप्तान से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक
मायर्स जिम्बाब्वे की 2020 अंडर-19 विश्व कप टीम के कप्तान थे और केवल एक साल बाद उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। उसके बाद उन्होंने वनडे और टी20 दोनों फॉर्मेट खेले। फिर उन्होंने अपनी शिक्षा पर ध्यान देते हुए क्रिकेट से दूरी बना ली।
वापसी के बाद उनकी तीसरी ही पारी में 65 रनों की धैर्यपूर्ण और आक्रामक पारी ने दिखा दिया कि ब्रेक ने उन्हें और भी बेहतर बनाया है। भारत की मजबूत गेंदबाजी जिसमें टी20 विश्व कप 2024 के चैंपियंस भी शामिल थे—के सामने उनका प्रदर्शन काबिल-ए-तारीफ रहा।
भावनात्मक पल यह सपना जैसा है
मायर्स ने कहा, यह surreal है। बचपन से ऐसे मौकों का सपना देखते हैं। टीम के साथियों, परिवार और सबसे बढ़कर भगवान का शुक्रगुजार हूं। पिछले कुछ साल आसान नहीं थे लेकिन मैंने रास्ता खोज लिया। टीम में वापसी करना शानदार है और हमारा कोचिंग स्टाफ भी काफी सपोर्टिव है। आगे आने वाला समय इस टीम के लिए शानदार हो सकता है।
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नई पीढ़ी के खिलाड़ियों ने दिखाया दम
जिम्बाब्वे अब सीनियर खिलाड़ियों सीन विलियम्स और क्रेग एर्विन के बाद नई पीढ़ी को आगे ला रहा है। मायर्स और विकेटकीपर क्लाइव मदांदे ने मिलकर 77 रनों की साझेदारी कर टीम को संभाला जब शुरुआती 7 ओवर में टीम 39/5 पर संघर्ष कर रही थी।
मायर्स ने भारतीय स्पिनर रवि बिश्नोई, वॉशिंगटन सुंदर और अभिषेक शर्मा पर 31 गेंदों में 44 रन बनाए। मदान्दे ने भी शिवम दुबे पर दो छक्के जड़कर दबाव कम किया।
विकेट के अनुसार खेला, घबराया नहीं: मायर्स
उन्होंने बताया कि पिच आसान नहीं थी। यह ऐसी पिच नहीं थी जहां आप आते ही 200 की स्ट्राइक रेट से खेल सको। मैंने पहले गेंद को जमीन पर खेलकर टाइम लिया। जैसे-जैसे मैं सेट हुआ, मैंने शॉट सेलेक्शन बढ़ाया। बाकी खिलाड़ियों का इरादा अच्छा था, बस कुछ शॉट्स कनेक्ट नहीं हुए।
सीरीज की शुरुआत धीमी, लेकिन आत्मविश्वास बरकरार
वापसी के पहले मैच में उन्होंने 23(22) रन बनाए थे, जबकि दूसरे में शून्य पर आउट हुए। उस मैच में उन्हें अभिषेक शर्मा ने एक ओवर में 4, 6, 4, 6, 4 कुल 28 रन भी मारे।
लेकिन मायर्स ने कहा कि इससे उनका आत्मविश्वास बिल्कुल नहीं टूटा:
कठिन हालात आपको या तो मजबूत बनाते हैं या पीछे धकेलते हैं। मेरे लिए ये सीखने का बड़ा मौका था। मैंने इसे नेगेटिव नहीं लिया। बस समझा कि और मेहनत कहां करनी है।
फील्डिंग में चूक, लेकिन टीम क्षमता पर भरोसा
ज़िम्बाब्वे ने पहले टी20 में बेहतरीन फील्डिंग की थी, लेकिन अगले दो मैचों में कई कैच और रन-सेविंग मौके गंवाए।
मायर्स ने कहा की हमने कुछ मौकों पर लाइन-लेंथ में गलती की और फील्डिंग में भी चूक हुई। फर्क छोटे-छोटे पलों का रहा। लेकिन इंडिया ने भी अच्छा खेला।
दिऑन मायर्स की यह पारी और उनके विचार बताते हैं कि न सिर्फ उनका खेल, बल्कि उनका व्यक्तित्व भी परिपक्व हुआ है। ज़िम्बाब्वे की नई टीम युवा ऊर्जा और नई सोच के साथ भविष्य में बड़ा धमाका कर सकती है। मायर्स की वापसी ने टीम को एक नई उम्मीद भी दे दी है।

