नई दिल्ली।
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 संसद में पेश किया गया, जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा का विस्तृत खाका सामने रखा गया है। बजट से पहले आने वाला यह सर्वे सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण का आईना माना जाता है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती और लचीलापन दिखाया है और आने वाले समय में स्थिर विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं।
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सर्वे में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत रही है। घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च और निजी निवेश ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। सर्वे के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोग में सुधार देखा गया है, जिससे आर्थिक विकास को सहारा मिला है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने भी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
महंगाई को लेकर इकोनॉमिक सर्वे 2026 में संतुलित तस्वीर पेश की गई है। सर्वे के मुताबिक, मुद्रास्फीति नियंत्रण में रही है, हालांकि खाद्य पदार्थों और कुछ जरूरी वस्तुओं की कीमतों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सरकार और रिजर्व बैंक के समन्वित प्रयासों से महंगाई को लक्ष्य दायरे में रखने में मदद मिली है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ा। सर्वे में यह भी कहा गया है कि आगे चलकर सप्लाई चेन सुधार और उत्पादन बढ़ने से कीमतों में और स्थिरता आ सकती है।
राजकोषीय स्थिति की बात करें तो आर्थिक सर्वे में सरकार के वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया गया है। राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सरकारी खर्च में पूंजीगत निवेश को प्राथमिकता दी गई है, जिससे दीर्घकालीन विकास को मजबूती मिल सके। सर्वे के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से रोजगार सृजन और निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिला है।
इकोनॉमिक सर्वे 2026 का एक अहम पहलू तकनीक और नवाचार पर दिया गया विशेष जोर है। सर्वे में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई है। इसमें कहा गया है कि एआई, डेटा और नई तकनीकें भविष्य में भारत की आर्थिक वृद्धि और उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। सरकार का फोकस डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने पर है।
रोजगार और निवेश के मोर्चे पर भी सर्वे ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर बना हुआ है और घरेलू निवेश में भी सुधार देखा गया है। सर्वे के अनुसार, भारत की जनसांख्यिकीय संरचना और कुशल युवा आबादी आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास का बड़ा आधार बन सकती है।
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वैश्विक परिदृश्य को लेकर इकोनॉमिक सर्वे 2026 में सतर्क रुख अपनाया गया है। इसमें बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक मंदी की आशंकाएं बनी हुई हैं। हालांकि, मजबूत घरेलू मांग और नीतिगत सुधारों के चलते भारत इन चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। सर्वे यह संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कुल मिलाकर, इकोनॉमिक सर्वे 2026 भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार बताता है। विकास दर, महंगाई नियंत्रण, राजकोषीय अनुशासन और तकनीक पर फोकस इस सर्वे के प्रमुख संदेश हैं। यह सर्वे बजट 2026 के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है और संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत आर्थिक रूप से और सशक्त बन सकता है।

