नई दिल्ली, 25 अप्रैल।
देश के कई हिस्सों में तेजी से बढ़ते तापमान के बीच मौसम विभाग ने हीटवेव को लेकर अलर्ट जारी किया है। उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है, जबकि राजस्थान के श्रीगंगानगर में 44.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन के सबसे अधिक तापमान में से एक है।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बनने की संभावना है। इसके साथ ही मध्य भारत के क्षेत्रों में भी गर्मी का असर तेज रहने का अनुमान है।
तापमान सामान्य से ऊपर, बढ़ा हीट स्ट्रेस
कई राज्यों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया जा रहा है। इससे हीट स्ट्रेस की स्थिति बन रही है, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती गर्मी के कारण हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
तटीय और पूर्वी क्षेत्रों में उमस भरी गर्मी
मौसम विभाग ने बताया कि तटीय और पूर्वी भारत के राज्यों में गर्म और उमस भरे हालात बने रहेंगे। वहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में रात के समय भी गर्मी बनी रहेगी, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पाएगी।
अगले कुछ दिनों का पूर्वानुमान
पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में 27 अप्रैल तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, इसके बाद धीरे-धीरे गिरावट आ सकती है। वहीं मध्य और अन्य क्षेत्रों में तापमान पहले बढ़ेगा और फिर उसमें कमी आने की संभावना है।
हीटवेव से बचाव के लिए एडवाइजरी
मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है—
- दोपहर के समय (12 बजे से 4 बजे तक) सीधे धूप में निकलने से बचें
- पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ का सेवन करें
- हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें
- ज्यादा शारीरिक मेहनत वाले काम से बचें
- धूप में बाहर जाते समय सिर को ढककर रखें
संवेदनशील वर्ग पर विशेष ध्यान
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इन वर्गों में हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, तेज बुखार और बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
जलवायु परिवर्तन का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण देश में हीटवेव की घटनाएं बढ़ रही हैं। पहले जहां गर्मी सीमित समय तक रहती थी, अब इसकी अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य बल्कि कृषि और जल संसाधनों पर भी असर पड़ रहा है।
Read More: झारखंड बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2026 घोषित: 95.278% छात्र पास
प्रशासन की तैयारी
कई शहरों में स्थानीय प्रशासन ने गर्मी से राहत देने के लिए पानी के टैंकर, सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था और हेल्थ अलर्ट जारी किए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करें।
तेजी से बढ़ती गर्मी के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। आने वाले दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव के बावजूद गर्मी से राहत फिलहाल दूर नजर आ रही है।



