नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण बाजार में चिंता बढ़ गई है, जिसके चलते तेल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड फिर 90 डॉलर के पार
बुधवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड लगभग 3.80 प्रतिशत बढ़कर 91.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले मंगलवार को बाजार बंद होने तक इसकी कीमत लगभग 88 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थी।
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वहीं अमेरिकी मानक डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड की कीमतों में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई। डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 4.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 86.86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से मध्य पूर्व में जारी तनाव और संभावित आपूर्ति संकट की वजह से आई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में सबसे बड़ी चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग से तेल की आवाजाही बाधित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आशंका के कारण बाजार में आपूर्ति संकट को लेकर डर बढ़ गया है। इससे निवेशकों और व्यापारियों के बीच तेल की कीमतों में संभावित उछाल को लेकर चिंता बढ़ी है।
IEA ने आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का प्रस्ताव दिया
तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी एक बड़ा कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी लगभग 400 मिलियन बैरल आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की योजना पर विचार कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक तेल रिलीज होगा।
इससे पहले वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं। उस समय IEA के सदस्य देशों ने मिलकर लगभग 182 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी किया था।
जी-7 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भी चर्चा
मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर मंगलवार को पेरिस में जी-7 देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में वैश्विक तेल बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव और संभावित उपायों पर चर्चा की गई।
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IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बताया कि बैठक में बाजार को स्थिर रखने के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया गया। इसमें सदस्य देशों के पास मौजूद आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की संभावना भी शामिल है।
ओपेक देशों में उत्पादन घटने से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अरब खाड़ी क्षेत्र में मौजूद ओपेक के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने हाल के दिनों में उत्पादन भी कम किया है। भंडारण क्षमता की कमी और परिवहन मार्गों में बाधा के कारण उत्पादन में कटौती की खबरें सामने आई हैं। इससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
यदि इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजार तक नहीं पहुंच पाता है, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है। खासतौर पर वे देश जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उन्हें ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और प्रमुख तेल उत्पादक देश आपूर्ति बनाए रखने के लिए कदम उठाते हैं, तो स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
फिलहाल वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह से मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर रखे हुए है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम के आधार पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

