नई दिल्ली।
वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक बार फिर उथल-पुथल के बीच क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। बिटकॉइन, एथेरियम समेत ज्यादातर प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी लाल निशान में कारोबार कर रही हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बीते कुछ दिनों में क्रिप्टो मार्केट कैप में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्रिप्टो क्यों क्रैश हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक क्रिप्टो बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता है। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख, महंगाई पर काबू पाने की कोशिश और केंद्रीय बैंकों की नीतियों ने जोखिम भरे निवेशों से पैसा बाहर निकालने का माहौल बना दिया है। क्रिप्टो को अब भी हाई-रिस्क एसेट माना जाता है, ऐसे में निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे डॉलर, बॉन्ड और गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं।
दूसरा बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंकों के संकेत हैं। फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर स्पष्ट संकेत न मिलने से बाजारों में निराशा है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक क्रिप्टो जैसी अस्थिर संपत्तियों से दूरी बनाते हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन और एथेरियम जैसे बड़े कॉइनों पर भी बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
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इसके अलावा रेगुलेटरी डर भी क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में क्रिप्टो एक्सचेंजों, स्टेबलकॉइन और डेफी प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियमों की चर्चा तेज है। कुछ देशों में टैक्स नियम कड़े किए गए हैं, तो कहीं मनी लॉन्ड्रिंग और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है। इन कदमों से अल्पकाल में बाजार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
क्रिप्टो गिरावट की एक और अहम वजह बड़े निवेशकों (व्हेल्स) की बिकवाली मानी जा रही है। ऑन-चेन डेटा के अनुसार, हाल के सत्रों में बड़े वॉलेट्स से एक्सचेंजों पर भारी मात्रा में बिटकॉइन और अन्य टोकन ट्रांसफर किए गए, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव आया। जैसे ही कीमतें गिरनी शुरू हुईं, छोटे निवेशकों में घबराहट फैली और उन्होंने भी बिकवाली तेज कर दी।
टेक्निकल फैक्टर्स भी इस गिरावट में भूमिका निभा रहे हैं। कई प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ चुकी हैं, जिससे ऑटोमैटिक स्टॉप-लॉस ट्रिगर हुए और गिरावट और गहरी हो गई। इसके साथ ही डेरिवेटिव मार्केट में लीवरेज पोजीशन लिक्विडेट होने से बाजार में और दबाव बना।
भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजारों की कमजोरी का असर भी क्रिप्टो पर पड़ा है। जब ग्लोबल स्टॉक मार्केट में गिरावट आती है, तो क्रिप्टो अक्सर उससे अछूता नहीं रहता। निवेशक जोखिम कम करने के लिए एक साथ कई एसेट क्लास से पैसा निकालते हैं, जिसका सीधा असर डिजिटल करेंसी पर दिखता है।
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हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए अवसर भी हो सकती है। उनका कहना है कि क्रिप्टो बाजार पहले भी कई बार तेज गिरावट के बाद मजबूत वापसी कर चुका है। लेकिन फिलहाल अल्पकाल में अस्थिरता बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
क्रिप्टो क्रैश के पीछे ब्याज दरों की अनिश्चितता, रेगुलेटरी सख्ती, बड़े निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक दबाव जैसे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे जल्दबाजी में फैसले न लें, जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें और बाजार की स्थिति साफ होने तक सतर्क रहें, क्योंकि आने वाले दिनों में क्रिप्टो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

