बिहार राज्य महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, 20 दिन में जवाब तलब; सत्ता और विपक्ष—दोनों ने बयान को बताया अपमानजनक
पटना।
बिहारी लड़कियां 20 से 25 हजार रुपये में शादी के लिए मिल जाती हैं। यह कहना है उत्तराखंड की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्या के पति गिरिधारी लाल साहू का।
यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक आक्रोश की लहर दौड़ गई। मामला देखते ही देखते सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया।

वायरल वीडियो में गिरिधारी लाल साहू कुछ युवकों से बातचीत करते हुए उनके वैवाहिक जीवन पर सवाल करते नजर आते हैं और फिर कम खर्च में बिहार की लड़कियों से शादी जैसी टिप्पणी कर देते हैं। इस कथन को महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और असंवेदनशील बताते हुए सभी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजद ने इस बयान को बिहार की बेटियों की गरिमा पर सीधा हमला बताते हुए मंत्री रेखा आर्या को मंत्रिमंडल से हटाने और उनके पति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि बिहार की महिलाओं को सस्ता और कमजोर दिखाने की मानसिकता निंदनीय है और इसके लिए सार्वजनिक माफी जरूरी है। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार की महिलाएं कोई वस्तु नहीं हैं, जिन्हें खरीदा या बेचा जाए। पार्टी नेताओं ने इसे पूरे प्रदेश की महिलाओं का अपमान बताया और केंद्र नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की।
हैरानी की बात यह रही कि सत्तारूढ़ एनडीए के नेता भी इस मुद्दे पर चुप नहीं रहे। सांसद रामप्रीत मंडल ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि गिरिधारी लाल साहू ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी तो उन्हें अदालत का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार की महिलाओं के सम्मान पर कोई समझौता नहीं होगा। एलजेपी (रामविलास) ने भी बयान को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि ऐसी सोच रखने वालों के लिए राजनीति में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। वहीं भाजपा नेताओं ने खुद को इस बयान से अलग करते हुए स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी पार्टी की संस्कृति नहीं है और इसकी कड़ी निंदा की जाती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गिरिधारी लाल साहू को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उन्हें 20 दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है और चेतावनी दी है कि जवाब न देने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि बिहार की महिलाएं आज शिक्षा, प्रशासन, खेल और राजनीति हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही हैं, ऐसे में इस तरह के बयान समाज को शर्मसार करने वाले हैं। इस विवाद ने एक बार फिर महिलाओं के सम्मान, क्षेत्रीय अस्मिता और राजनीतिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी लोग एक सुर में कह रहे हैं बिहार की बेटियां बिकाऊ नहीं, सम्मान की हकदार हैं।

