Tuesday, February 10, 2026

Latest Posts

निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह: सतगुरु के सान्निध्य में 82 जोड़े बने जीवनसाथी, सादगी और एकत्व का संदेश

चंडीगढ़/पंचकुला/मोहाली/सांगली। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सान्निध्य में आयोजित भव्य निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह में 82 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंध गए। यह आयोजन महाराष्ट्र के 59वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के विधिवत समापन के बाद सांगलवाड़ी (सांगली) स्थित समागम स्थल पर संपन्न हुआ। समारोह में महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए वर-वधुओं ने सादगीपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में सात जन्मों का साथ निभाने का संकल्प लिया।

Also Read: मर्दानी 3: रानी मुखर्जी एक बार फिर दमदार अंदाज़ में लौटेंगी

इस सामूहिक विवाह समारोह की शुरुआत पारंपरिक जयमाला से हुई, जिसके बाद निरंकारी विवाह की विशिष्ट पहचान ‘सांझा-हार’ प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को मिशन के प्रतिनिधियों द्वारा पहनाया गया। इसके पश्चात निरंकारी लावों का पठन किया गया, जिनके माध्यम से आदर्श गृहस्थ जीवन, आपसी सहयोग और आध्यात्मिक मूल्यों की प्रेरणा दी गई। पूरे आयोजन में सादगी, अनुशासन और आध्यात्मिक गरिमा स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वचन देते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन केवल व्यक्तिगत सुख का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक दायित्वों को निभाने का मार्ग भी है। उन्होंने वर-वधुओं को प्रेम, सम्मान, समर्पण और आपसी समझ के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। सतगुरु माता जी ने कहा कि सत्संग, सेवा और सिमरण से जुड़े रहकर गृहस्थ जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है और पति-पत्नी एक-दूसरे के सहयोग से भक्ति मार्ग को और सुदृढ़ बना सकते हैं।

समारोह के दौरान सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्प-वर्षा कर अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया। उनके साथ उपस्थित साध संगत और परिजनों ने भी पुष्प-वर्षा की, जिससे समूचा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास और भावनात्मक आनंद से भर गया। यह दृश्य श्रद्धा, प्रेम और एकत्व का प्रतीक बन गया, जिसे उपस्थित संगत ने जीवनभर के लिए स्मरणीय बताया।

निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह: सतगुरु के सान्निध्य में 82 जोड़े बने जीवनसाथी, सादगी और एकत्व का संदेश

इस सामूहिक विवाह में महाराष्ट्र के सांगली, सातारा, कोल्हापुर, सोलापुर, धाराशिव, मुंबई, ठाणे, पुणे, डोंबिवली, पालघर, छत्रपति संभाजीनगर, अहिल्यानगर, धुले, जलगांव, नासिक, लातूर, बीड, परभणी, नागपुर, वर्धा, गोंदिया, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग सहित कई जिलों से जोड़े शामिल हुए। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, गाजीपुर और प्रयागराज, कर्नाटक के बेलगावी और उडुप्पी तथा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर (सरगुजा) से भी नवविवाहित युगल इस समारोह का हिस्सा बने। विवाह उपरांत सभी अतिथियों और वर-वधुओं के लिए समागम स्थल पर भोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी।

Also Read: लद्दाख की रातों में दिखी लाल आभा, ‘रेड ऑरोरा’ ने रचा दुर्लभ नज़ारा

निरंकारी मिशन द्वारा आयोजित इस सामूहिक विवाह की विशेष बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में स्नातक, स्नातकोत्तर और उच्च शिक्षित युवक-युवतियाँ शामिल हुईं। सभी ने सादगीपूर्ण विवाह को अपनाकर फिजूलखर्ची और दिखावे से दूर रहने का संदेश दिया। यह आयोजन समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा, जहां जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर एकत्व और समानता का भाव देखने को मिला।

निसंदेह, निरंकारी मिशन की सादा शादियों की यह परंपरा समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही है। यह आयोजन न केवल विवाह संस्कार को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और मानवीय मूल्यों को भी सशक्त करता है। सतगुरु के पावन सान्निध्य में संपन्न यह सामूहिक विवाह समारोह श्रद्धा, सादगी और एकत्व का जीवंत उदाहरण बनकर सभी के लिए प्रेरणा स्रोत सिद्ध हुआ।

Latest Posts

Don't Miss

Stay in touch

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.