सांगली। महाराष्ट्र के सांगली जिले में आगामी 24, 25 और 26 जनवरी 2026 को आयोजित होने जा रहे 59वें वार्षिक निरंकारी संत समागम को लेकर पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास और उत्साह का वातावरण है। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज तथा निरंकारी राजपिता रमित के पावन सान्निध्य में होने वाला यह भव्य आयोजन पहली बार सांगली की पावन धरती पर आयोजित किया जा रहा है, जिससे नगर को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ है।
कृष्णा नदी के सुरम्य तट पर स्थित, स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिसिंह नाना पाटील की कर्मभूमि सांगली इन दिनों भक्ति, सेवा और समर्पण के रंग में रंगी हुई दिखाई दे रही है। समागम स्थल सांगलवाड़ी के विशाल मैदान में 28 दिसंबर 2025 से ही सेवा कार्यों का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। तभी से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों निरंकारी सेवादल सदस्य, स्वयंसेवक और श्रद्धालु भक्त निष्काम भाव से सेवाओं में जुटे हुए हैं।
यह संत समागम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम, शांति और एकत्व का जीवंत संदेश है। यहाँ धर्म, जाति, भाषा, प्रांत और सामाजिक भेदभाव की सभी दीवारें स्वतः ही गिर जाती हैं। समागम स्थल पर हर कोई समान भाव से सेवा, सत्संग और सिमरन में लीन दिखाई देता है, जो इस आयोजन को विशेष और अनुपम बनाता है।
इन दिनों समागम स्थल पर तैयारियाँ तीव्र गति से चल रही हैं। विशाल मैदानों को समतल किया जा रहा है, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भव्य सत्संग पंडाल, आवासीय टेंट, छायादार शामियाने, मार्ग निर्माण और आवश्यक सुविधाओं से युक्त एक सुव्यवस्थित अस्थायी नगरी आकार ले रही है। हर व्यवस्था में अनुशासन, समर्पण और सामूहिक सहयोग की झलक साफ दिखाई देती है।
श्रद्धालु भक्त सेवा को बोझ नहीं, बल्कि परम सौभाग्य मानकर कर रहे हैं। कोई सफाई में जुटा है, तो कोई निर्माण कार्य में, कोई मार्गदर्शन में लगा है, तो कोई भोजन और जल सेवा में। हर चेहरे पर संतोष, प्रसन्नता और आत्मिक आनंद झलक रहा है। समागम स्थल पर सेवा और भक्ति का यह दृश्य स्वयं में एक प्रेरणादायक आध्यात्मिक संदेश बन गया है।
आगामी दिनों में सांगली एक विशाल ‘भक्ति नगर’ में परिवर्तित हो जाएगा, जहाँ देश-विदेश से लाखों संत-महात्मा और श्रद्धालु एकत्र होकर प्रेम, सद्भाव और मानवता के इस महासंगम के साक्षी बनेंगे। 59वां निरंकारी संत समागम न केवल आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सांगली को वैश्विक स्तर पर एकता और शांति के प्रतीक के रूप में भी स्थापित करेगा।

