Tuesday, February 10, 2026

Latest Posts

रवनीत सिंह बिट्टू का कांग्रेस से बीजेपी तक का सियासी सफर

नई दिल्ली।

पंजाब की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम रहे रवनीत सिंह बिट्टू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू ने बीते कुछ वर्षों में ऐसा राजनीतिक मोड़ लिया है, जिसने न सिर्फ पंजाब बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दिया है। कांग्रेस से लंबे समय तक जुड़े रहने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होना और केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना, उनके सियासी करियर का अहम अध्याय बन चुका है।
रवनीत सिंह बिट्टू का जन्म एक राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ। उनके दादा बेअंत सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री रहे और आतंकवाद के दौर में राज्य को स्थिरता की ओर ले जाने में उनकी भूमिका को आज भी याद किया जाता है। इसी विरासत के साथ बिट्टू ने राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। युवा कांग्रेस से लेकर लोकसभा तक का उनका सफर अपेक्षाकृत तेज रहा। उन्होंने पंजाब की लुधियाना सीट से कई बार लोकसभा चुनाव जीता और संसद में एक सक्रिय सांसद के रूप में पहचान बनाई।

Also Read: ब्राजील में भीषण सड़क हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत

कांग्रेस के भीतर बिट्टू को एक तेज-तर्रार और जमीनी नेता माना जाता था। वे किसानों, युवाओं और औद्योगिक श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे। संसद में उनके भाषण और पार्टी लाइन से हटकर कुछ मामलों में बेबाक राय रखने की शैली ने उन्हें अलग पहचान दी। हालांकि, समय के साथ कांग्रेस नेतृत्व से उनके मतभेद सामने आने लगे। पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान, नेतृत्व को लेकर असंतोष और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीति से दूरी ने उनके राजनीतिक भविष्य को नए रास्ते की ओर मोड़ दिया।

2024 के आसपास रवनीत सिंह बिट्टू का बीजेपी में शामिल होना पंजाब की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना गया। बीजेपी ने इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया, जबकि कांग्रेस ने इस फैसले को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा करार दिया। बिट्टू ने पार्टी बदलने के अपने फैसले को राष्ट्रीय हित, स्थिर सरकार और विकास की राजनीति से जोड़ा। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें राष्ट्रीय मंच पर अधिक सक्रिय भूमिका मिली और केंद्र की राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा।

बीजेपी में आने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू को पार्टी ने पंजाब में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी। एक ऐसे राज्य में जहां बीजेपी परंपरागत रूप से सीमित प्रभाव रखती रही है, वहां बिट्टू जैसे नेता को रणनीतिक तौर पर अहम माना गया। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बन रही है जो कांग्रेस की राजनीति को करीब से जानता है और उसी अनुभव के आधार पर बीजेपी को राज्य में विस्तार देने में मदद कर सकता है।

राष्ट्रीय राजनीति में बिट्टू की सक्रियता भी लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार के कार्यक्रमों, विकास योजनाओं और पंजाब से जुड़े मुद्दों पर वे खुलकर अपनी बात रखते नजर आते हैं। उनका फोकस उद्योग, रोजगार, बुनियादी ढांचा और युवाओं के लिए अवसरों पर रहा है। वे अकसर कहते हैं कि पंजाब को राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ आर्थिक पुनरुत्थान की जरूरत है और इसके लिए केंद्र-राज्य के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है।

Also Read: गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने 9 मंजिला इमारत से कूदकर की खुदकुशी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रवनीत सिंह बिट्टू का सफर अभी निर्णायक मोड़ पर है। कांग्रेस से बीजेपी तक का उनका बदलाव सिर्फ पार्टी परिवर्तन नहीं, बल्कि उनकी राजनीति की दिशा में बड़ा परिवर्तन है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे पंजाब में बीजेपी को कितनी मजबूती दे पाते हैं और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान किस हद तक स्थापित करते हैं।
कुल मिलाकर, रवनीत सिंह बिट्टू आज ऐसे नेता के रूप में उभर रहे हैं जिनका अनुभव, पारिवारिक विरासत और बदली हुई राजनीतिक रणनीति उन्हें खास बनाती है। उनका सियासी सफर यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति में बदलते दौर के साथ नेता भी नए रास्ते चुन रहे हैं और अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।

Latest Posts

Don't Miss

Stay in touch

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.