नई दिल्ली। आज भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। कारोबारी सत्र के दौरान Sensex और Nifty दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते नजर आए और दिन के अंत तक कमजोरी के साथ बंद हुए। बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके पीछे वैश्विक संकेत, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली, निवेशकों की मुनाफावसूली और आर्थिक अनिश्चितता जैसे कई अहम कारण रहे। आज के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला, जहां Infosys, TCS, Wipro और HCL Tech जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में टेक शेयरों की कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
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अमेरिका के प्रमुख इंडेक्स Nasdaq और S&P 500 में हालिया गिरावट के बाद विदेशी निवेशकों ने उभरते बाजारों से भी पैसा निकालना शुरू किया, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता और महंगाई के आंकड़ों को लेकर निवेशकों की सतर्कता भी बाजार की गिरावट की बड़ी वजह मानी जा रही है। क्या हुआ आज शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। कब यह गिरावट आज के कारोबारी सत्र के दौरान सुबह से ही देखने को मिली और दिनभर दबाव बना रहा। कहां इसका असर भारतीय शेयर बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी दिखा, खासकर टेक सेक्टर में।
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इस गिरावट से सबसे ज्यादा नुकसान आईटी सेक्टर के निवेशकों और शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को हुआ। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली, एफआईआई की निकासी, मुनाफावसूली और आर्थिक अनिश्चितता इसके प्रमुख कारण रहे। इन सभी कारणों के चलते निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज किया और बिकवाली बढ़ गई, जिससे बाजार नीचे आ गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना बेहतर समझा, वहीं कमजोर ग्लोबल संकेतों ने दबाव को और बढ़ा दिया। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स इसे लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अवसर भी मान रहे हैं और सलाह दे रहे हैं कि घबराहट में फैसले लेने से बचें। कुल मिलाकर, आज की गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल ग्लोबल फैक्टर्स और सेक्टर-स्पेसिफिक खबरों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है और आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेगी।

