फरीदाबाद।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 एक बार फिर भारतीय लोक संस्कृति, परंपरा और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने पेश करने के लिए तैयार है। हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक सूरजकुंड में आयोजित होने वाला यह मेला देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी कलाकारों, शिल्पकारों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। वर्ष 2026 में यह मेला और भी भव्य स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश की लोक कलाओं, हस्तशिल्प, खानपान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।
सूरजकुंड मेला 2026 में भारत के लगभग सभी राज्यों की भागीदारी देखने को मिल रही है। हर राज्य की अपनी थीम पवेलियन के माध्यम से वहां की लोक कला, पारंपरिक वस्त्र, आभूषण, हस्तनिर्मित सामान और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके साथ ही कई विदेशी देशों के शिल्पकार भी इस मेले में हिस्सा ले रहे हैं, जो अपनी-अपनी सांस्कृतिक झलक के साथ पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। यही वजह है कि सूरजकुंड मेला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली हुई है।
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मेले का मुख्य आकर्षण यहां मिलने वाला पारंपरिक हस्तशिल्प है। लकड़ी, धातु, मिट्टी, बांस, कपड़ा और पत्थर से बनी हस्तनिर्मित वस्तुएं लोगों को खूब लुभा रही हैं। कारीगरों द्वारा अपने हाथों से बनाई गई ये वस्तुएं न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को भी मजबूती प्रदान करती हैं। सूरजकुंड मेला शिल्पकारों के लिए एक बड़ा मंच साबित होता है, जहां वे अपनी कला को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा पाते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम सूरजकुंड मेला 2026 की जान माने जाते हैं। मेले के दौरान देश-विदेश के कलाकार लोक नृत्य, लोक संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से अपनी संस्कृति को जीवंत करते हैं। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। हर दिन शाम को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले की रौनक को और बढ़ा देते हैं और बड़ी संख्या में लोग इन्हें देखने पहुंचते हैं।
खानपान के शौकीनों के लिए सूरजकुंड मेला 2026 किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजन एक ही स्थान पर चखने को मिलते हैं। राजस्थानी दाल-बाटी-चूरमा से लेकर दक्षिण भारतीय डोसा-इडली, बंगाली मिठाइयों से लेकर उत्तर भारत के चाट-पकौड़े तक, हर स्वाद के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है। इसके अलावा विदेशी व्यंजन भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
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सुरक्षा और सुविधाओं के लिहाज से इस बार सूरजकुंड मेला 2026 में खास इंतजाम किए गए हैं। मेले में आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग, परिवहन, चिकित्सा सहायता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है। डिजिटल टिकटिंग, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के मेले का आनंद ले सकें।
सूरजकुंड मेला न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतीक भी है। यह मेला कलाकारों और शिल्पकारों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करता है। सूरजकुंड मेला 2026 में उमड़ रही भीड़ यह साबित करती है कि आज भी लोगों में लोक कला और संस्कृति के प्रति गहरी रुचि बनी हुई है। कुल मिलाकर, सूरजकुंड मेला 2026 भारतीय संस्कृति का उत्सव है, जो हर किसी को एक बार जरूर अनुभव करना चाहिए।

