Friday, February 27, 2026

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T20 World Cup 2026: छोटे भाई के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए खेल रहे हैं तादीवानाशे मरुमानी

चेन्नई । T20 World Cup 2026 के सुपर-8 चरण में पहुंच चुकी जिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के ओपनर तादीवानाशे मरुमानी अपनी शानदार बल्लेबाजी से सुर्खियों में हैं। लेकिन इस युवा खिलाड़ी की सफलता के पीछे एक बेहद भावुक कहानी है अपने छोटे भाई के उस सपने को पूरा करने की कहानी, जो बीमारी के कारण अधूरा रह गया।

तादीवानाशे कहते हैं कि Grateful यानी कृतज्ञता उनके करियर को परिभाषित करने वाला शब्द है। ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाने वाले इस विकेटकीपर-ओपनर की पीठ पर सिर्फ अपना नाम नहीं लिखा होता, बल्कि अपने छोटे भाई का सपना भी साथ होता है।

तीन भाई-बहनों में सबसे प्रतिभाशाली था तानात्स्वा

मरुमानी परिवार के तीनों भाई-बहनों का क्रिकेट से गहरा जुड़ाव रहा है। बड़े भाई तादीवानाशे जिम्बाब्वे सीनियर टीम में खेलते हैं, जबकि उनकी बहन तव्वान्याशा ने 2024 तक महिला टीम का प्रतिनिधित्व किया।

लेकिन तीनों में सबसे प्रतिभाशाली थे छोटे भाई तानात्स्वा, जिन्होंने क्रिकेट स्कॉलरशिप पर लिलफोर्डिया स्कूल में प्रवेश लिया यह वही स्कूल है जिसने दिग्गज खिलाड़ी एंडी फ्लावर जैसे सितारे तैयार किए। बाद में वे फाल्कन कॉलेज में भी क्रिकेट सुधारने पहुंचे। परिवार को पूरा विश्वास था कि तानात्स्वा जल्द ही जिम्बाब्वे के लिए खेलेंगे। लेकिन किस्मत ने उन्हें एक कठिन मोड़ पर ला दिया।

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अचानक टूटा सपना दोनों कूल्हों में सेप्टिक आर्थराइटिस

2020 में तानात्स्वा को दोनों कूल्हों में गंभीर सेप्टिक आर्थराइटिस हो गया। सर्जरी के बाद वे चलने तो लगे, पर क्रिकेटर का भविष्य खत्म हो गया। न तो वे ठीक से दौड़ पाए, न ही बल्ला थामने की पुरानी लय वापस आ सकी।

तादीवानाशे बताते हैं, मैं तब स्कूल में था। समझ नहीं पा रहा था कि कैसे संभालूं। उसके सपने को टूटते देखना बहुत मुश्किल था। हमने एक-एक दिन करके स्थिति संभाली, लेकिन यह बेहद भावुक समय था।

फिर चुना नया रास्ता स्पोर्ट्स फोटोग्राफी

क्रिकेट से दूर होने के बाद तानात्स्वा ने खेल को छोड़ने के बजाय उससे जुड़े रहने का रास्ता चुना स्पोर्ट्स फोटोग्राफी। कैमरे के जरिए उन्होंने अपनी नई पहचान बनाई।

अपनी वेबसाइट पर वे बताते हैं कि न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के बीच महत्वपूर्ण सीरीज और 2024 के जिम अफ्रो T10 लीग को उन्होंने कवर किया। तादीवानाशे कहते हैं, फोटोग्राफी उसके लिए खेल से जुड़े रहने का तरीका था। वह मैदान पर नहीं उतर सकता था, पर खेल से दूरी भी नहीं बनाना चाहता था।

कृतज्ञता और विश्वास मरुमानी परिवार की ताकत

24 वर्षीय तादीवानाशे अपने भाई की संघर्ष-यात्रा से बहुत कुछ सीखते रहे हैं। वे बताते हैं कि उनके नामों के पीछे भी गहरी आध्यात्मिक भावना है।

इसके साथ ही, टीम के भीतर भाईचारे और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना भी देखने को मिलती है। जिम्बाब्वे टीम के खिलाड़ियों का कहना है कि Tadiwanashe Marumani न सिर्फ मैदान पर बल्कि बाहर भी अपने छोटे भाई की हिम्मत और संघर्ष को हमेशा याद रखते हैं। उनके साथी खिलाड़ी बताते हैं।

जब भी वह क्रीज पर उतरते हैं, तो उनके चेहरे पर एक अलग आत्मविश्वास दिखाई देता है, जैसे वह अपने भाई Tanatswa के सपनों को भी साथ लेकर खेल रहे हों।

टीम मैनेजमेंट का मानना है कि ऐसी कहानियाँ खिलाड़ियों के मानसिक हौसले को बढ़ाती हैं और टीम के भीतर एक सकारात्मक माहौल बनाती हैं। इस वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे की तरफ से मिल रही कड़ी चुनौती के पीछे भी इसी एकता और मजबूत भावनात्मक जुड़ाव को बड़ी वजह माना जा रहा है

तादीवानाशे मरुमानी का अर्थ है भगवान द्वारा दिया गया प्रेम

तानात्स्वा का अर्थ है भगवान की दया या कृपा तादीवानाशे कहते हैं, सबसे जरूरी बात यह है कि मैं हर उपलब्धि के लिए पहले से आभारी रहता हूं। जो मिला है, वह निश्चित या गारंटीशुदा नहीं था। इसलिए हर पल कृतज्ञता ज़रूरी है।

भारत के खिलाफ मुकाबले में भाई की प्रेरणा साथ

जब तादीवानाशे चेपॉक स्टेडियम में भारत का सामना करने उतरेंगे, तो उनके साथ केवल टीम का दबाव नहीं होगा, बल्कि भाई का संदेश भी हर बार वह मुझे मैसेज करता है बड़े भाई, तुम मेरी तरफ से भी खेलना। जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा की टीम के लिए भारत के खिलाफ जीत बेहद अहम होगी, और तादीवानाशे जानते हैं कि उन्हें यह मैच सिर्फ टीम के लिए नहीं, बल्कि अपने 21 वर्षीय भाई के सपने के लिए भी खेलना है।

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