Wednesday, February 25, 2026

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केंद्र ने दी मंजूरी: अब ‘Kerala’ कहलाएगा Keralam , दशकों पुरानी मांग पूरी

नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने दक्षिण भारत के राज्य Kerala का नाम बदलकर Keralam करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह निर्णय उन लाखों लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है, जो राज्य के पारंपरिक और मूल नाम को आधिकारिक रूप से मान्यता देने की मांग करते आए थे

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब संबंधित Kerala Bill, 2026 राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति द्वारा इसे राज्य विधानसभा से राय लेने के लिए भेजा जाएगा। विधानसभा के सुझावों के बाद केंद्र सरकार राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त कर इस बिल को संसद के समक्ष पेश करेगी। दोनों सदनों की मंजूरी के बाद नाम परिवर्तन औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा।

नाम बदलने की पृष्ठभूमि

राज्य की वाममोर्चा सरकार पिछले कई वर्षों से इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत थी। मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने 2023 और 2024 में दो बार विधानसभा में प्रस्ताव पेश कर यह तर्क दिया था कि राज्य का पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से मूल नाम Keralam है, जो मलयालम भाषा और स्थानीय परंपराओं में सदियों से उपयोग होता रहा है।

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1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के बाद भाषाई आधार पर राज्यों का गठन किया गया था। उसी वर्ष से 1 नवंबर को ‘केरल पिरवी’ यानी राज्य स्थापना दिवस भी मनाया जाता है। हालांकि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम अंग्रेज़ी में Kerala दर्ज कर दिया गया था, जबकि स्थानीय संस्कृति में Keralam शब्द का प्रयोग लगातार जारी रहा।

राज्य सरकार का मानना है कि नाम परिवर्तन सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को सशक्त करेगा। स्थानीय बुद्धिजीवियों और भाषा विशेषज्ञों का भी कहना है कि Keralam शब्द राज्य की प्राचीन पहचान और मलयालम भाषा की मूल भावना को बेहतर दर्शाता है।

केंद्र और राज्यों की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय केरल के लोगों की इच्छा और भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम है। कैबिनेट की यह बैठक हाल ही में बनाए गए नए परिसर Seva Teerth में आयोजित हुई, जहां से प्रधानमंत्री का कार्यालय भी संचालित होता है।

राज्य की सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार और Communist Party of India (CPI) ने इस फैसले का स्वागत किया है। सीपीआई नेताओं का कहना है कि Keralam राज्य की ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है और यह निर्णय जनता की भावनाओं के अनुरूप है। वहीं, भाजपा की केरल इकाई ने भी इसे राज्य की भाषाई विरासत को पुनर्स्थापित करने वाला कदम बताया।

दूसरी तरफ, West Bengal की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी राज्य सरकार वर्षों से West Bengal का नाम बदलकर Bengal करने की मांग कर रही है, लेकिन उस प्रस्ताव पर कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि Keralam का नाम बदलना राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर हुआ है।

पहले भी कई राज्यों और शहरों के नाम बदल चुके हैं

भारत में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर कई शहरों और राज्यों के नाम बदलने की मिसालें पहले भी देखी गई हैं।

  • Mumbai पूर्व नाम: बॉम्बे
  • Bengaluru पूर्व नाम: बैंगलोर
  • पुडुचेरी पूर्व नाम: पांडिचेरी
  • ओडिशा पूर्व नाम: उड़ीसा
  • उत्तराखंड पूर्व नाम: उत्तरांचल
  • Gurugram पूर्व नाम: गुरुगांव, जिसे 2016 में बदला गया था।

आगे की प्रक्रिया

नाम परिवर्तन प्रक्रिया अब राष्ट्रपति, राज्य विधानसभा और संसद की औपचारिक मंजूरी पर निर्भर करेगी। उसके बाद सरकारी दस्तावेजों, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, सरकारी वेबसाइटों, आधिकारिक मानचित्रों और संवैधानिक दस्तावेजों में Kerala की जगह Keralam लिखा जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है, लेकिन इसे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने वाली महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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