Tuesday, February 10, 2026

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Free Trade Agreement: भारत में सस्ती होंगी मर्सिडीज और BMW की इम्पोर्टेड कारें

नई दिल्ली। भारत सरकार और कई देशों के बीच हो रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का सीधा फायदा अब ऑटोमोबाइल सेक्टर में देखने को मिल सकता है। खास तौर पर जर्मनी की प्रमुख लग्ज़री कार कंपनियां मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) और BMW की इम्पोर्टेड गाड़ियां आने वाले समय में भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं। यदि आयात शुल्क (Import Duty) में प्रस्तावित कटौती लागू होती है, तो लग्ज़री कार खरीदने का सपना अब पहले से ज्यादा लोगों के लिए सुलभ हो सकता है।

क्या है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता, दो या दो से अधिक देशों के बीच किया गया ऐसा समझौता होता है, जिसके तहत आयात-निर्यात पर लगने वाले टैक्स और शुल्क को कम या खत्म किया जाता है।इसका उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और उपभोक्ताओं को सस्ते उत्पाद उपलब्ध कराना होता है।

इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती से क्या बदलेगा

फिलहाल भारत में पूरी तरह इम्पोर्ट की जाने वाली लग्ज़री कारों पर 60 से 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है। यही वजह है कि मर्सिडीज और BMW जैसी कारें भारत में बेहद महंगी हो जाती हैं। लेकिन FTA के तहत यदि यह शुल्क घटाया जाता है, तो इन कारों की कीमतों में लाखों रुपये की कमी आ सकती है।

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मर्सिडीज और BMW को होगा सीधा फायदा

जर्मन कार निर्माता कंपनियां लंबे समय से भारत में आयात शुल्क कम करने की मांग कर रही हैं। FTA लागू होने की स्थिति में:मर्सिडीज-बेंज की S-Class, E-Class जैसी प्रीमियम कारें सस्ती हो सकती हैं। BMW की 5 Series, 7 Series और X-सीरीज़ की कीमतों में गिरावट आ सकती हैइससे इन कंपनियों की बिक्री बढ़ने की पूरी संभावना है।

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी

लग्ज़री कार खरीदने वाले भारतीय ग्राहकों के लिए यह खबर बेहद राहत भरी है। अभी तक भारी टैक्स के कारण ये गाड़ियां सिर्फ एक सीमित वर्ग तक ही सीमित थीं, लेकिन कीमत कम होने से मिड-हाई इनकम ग्रुप के खरीदार भी इनकी ओर आकर्षित हो सकते हैं।

Free Trade Agreement भारत में सस्ती होंगी मर्सिडीज और BMW की इम्पोर्टेड कारें

घरेलू ऑटो उद्योग की चिंता

हालांकि, FTA को लेकर घरेलू ऑटोमोबाइल कंपनियों में चिंता भी है। उनका मानना है कि सस्ती इम्पोर्टेड कारों से मेक इन इंडिया को नुकसान पहुंच सकता है। भारतीय कार निर्माता चाहते हैं कि सरकार स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दे और आयात को सीमित रखे। सरकार का संतुलन बनाने का प्रयाससरकार इस मुद्दे पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। एक ओर वह विदेशी निवेश और ग्लोबल कंपनियों को आकर्षित करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर घरेलू उद्योग के हितों की रक्षा भी जरूरी है। इसी वजह से FTA की शर्तों पर गहन चर्चा चल रही है।

ऑटो बाजार पर संभावित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात शुल्क कम होता है, तो:लग्ज़री कार बाजार में तेज़ी आएगी।प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। सर्विस और आफ्टर-सेल्स नेटवर्क भी मजबूत होगा।

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कब तक लागू हो सकता है फैसला

फिलहाल FTA को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह साफ होगा कि आयात शुल्क में कितनी कटौती की जाएगी और इसका लाभ ग्राहकों को कब से मिलेगा।फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अगर लागू होता है, तो मर्सिडीज और BMW जैसी इम्पोर्टेड लग्ज़री कारों की कीमतों में कमी आना तय माना जा रहा है। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को फायदा होगा, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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