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विश्वबन्धुत्व के भाव को दर्शाता हुआ महाराष्ट्र का 59 वाँ निरंकारी संत समागम भव्य रूप से संपन्न

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज “कौस्तुभ पुरस्कार” से सम्मानित शाश्वत निराकार परमात्मा का बोध हर युग की आवश्यकता— निरंकारी सतगुरु माता जी चंडीगढ़/ पंचकूला/ मोहाली/ सांगली, 28 जनवरी 2026: महाराष्ट्र के 59वें वार्षिक निरंकारी संत...

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विश्वबन्धुत्व के भाव को दर्शाता हुआ महाराष्ट्र का 59 वाँ निरंकारी संत समागम भव्य रूप से संपन्न

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज “कौस्तुभ पुरस्कार” से सम्मानित

शाश्वत निराकार परमात्मा का बोध हर युग की आवश्यकता
— निरंकारी सतगुरु माता जी

चंडीगढ़/ पंचकूला/ मोहाली/ सांगली, 28 जनवरी 2026: महाराष्ट्र के 59वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का तीन दिवसीय आयोजन 26 जनवरी को सांगली में भव्य एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला से सैंकड़ों श्रद्धालु भक्त समागम कर वापस अपने घर लौटे। इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शाश्वत निराकार परमात्मा का बोध प्राप्त कर जीवन में प्रेम, दया और करुणा को अपनाना हर युग की आवश्यकता रही है।

सतगुरु माता जी ने कहा कि मनुष्य का दृष्टिकोण अक्सर नकारात्मक हो जाता है, जहाँ अच्छाई में भी दोष खोजे जाते हैं। जबकि संतजन परमात्मा के अहसास में जीते हुए अंधकार में भी प्रकाश की किरण को आधार बनाते हैं। ब्रह्मज्ञान द्वारा न केवल स्वयं का जीवन उज्ज्वल करते हैं, बल्कि समाज को भी प्रकाशमान करते हैं।

संतों के जीवन की विशेषता बताते हुए माता जी ने फरमाया कि संतों का जीवन दिखावे, छल-कपट से मुक्त, सहज, सरल और सर्वकल्याण को समर्पित होता है। सतगुरु माता जी ने निरंकारी भक्तों से सत्संग, सेवा सुमिरन के माध्यम से आत्ममंथन करते हुए सजग एवं सकारात्मक जीवन जीने का आह्वान किया।

विश्वबन्धुत्व के भाव को दर्शाता हुआ महाराष्ट्र का 59 वाँ निरंकारी संत समागम भव्य रूप से संपन्न

कवि दरबार
समागम के तीनों दिन “आत्ममंथन” विषय पर कवि दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से 22 कवियों एवं कवित्रियों ने मराठी, हिंदी, पंजाबी, हरियाणवी, भोजपुरी एवं अंग्रेजी भाषाओं में काव्य पाठ प्रस्तुत किया, जिसका भरपूर आनंद श्रद्धालु भक्तो ने लिया।

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“कौस्तुभ पुरस्कार” से सम्मान
समागम के तीसरे दिन महाराष्ट्र स्टेट जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “कौस्तुभ पुरस्कार” सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को प्रदान किया गया। यह पुरस्कार महाराष्ट्र के उच्च व तंत्र शिक्षण तथा संसदीय कार्य मंत्री एवं सांगली के पालक मंत्री माननीय श्री चंद्रकांत दादा पाटील के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया। संत निरंकारी मिशन द्वारा मानव मूल्यों की स्थापना, सामाजिक उत्थान, राष्ट्रीय एकता एवं समाज कल्याण हेतु किए जा रहे सतत प्रयासों को ध्यान में रखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया।

स्वास्थ्य सेवाएँ
समागम स्थल पर तीन डिस्पेंसरी, दो प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तथा आईसीयू सुविधा सहित अस्पताल की व्यवस्था की गई। एलोपैथी, आयुर्वेद एवं होम्योपैथी पद्धति से लगभग 50,000 श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गईं। इस व्यवस्था में 54 डॉक्टर एवं 326 चिकित्सा कर्मी कार्यरत रहे तथा आपातकाल हेतु 11 एम्बुलेंस तैनात रहीं।

कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा शिविर

प्रशंसनीय है कि कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा शिविर में विदेशों से 23 एवं भारत से 2 विशेषज्ञों ने निष्काम सेवा प्रदान की। तीन दिनों में लगभग 3,000 श्रद्धालुओं ने इस चिकित्सा का लाभ लिया।

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