सुखदेव ढांड ने कहा कि किसी दलित समुदाय से आने वाले राष्ट्रीय नेता की सभा के बाद किसी सार्वजनिक स्थान का धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से ‘शुद्धिकरण’ किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह केवल राजनीतिक असहमति का विषय नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता, मानव गरिमा और भारतीय संविधान की मूल भावना पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके स्पर्श, उपस्थिति या सार्वजनिक भागीदारी को अपवित्र मानना छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है। ऐसी सोच लोकतांत्रिक एवं आधुनिक भारत में किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकती।
सुखदेव ढांड ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता, सामाजिक न्याय और भेदभावमुक्त समाज की स्थापना का सपना देखा था। आज आवश्यकता है कि समाज को जाति और ऊंच-नीच के आधार पर बांटने वाली मानसिकता के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई जाए।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की इस कथित ‘शुद्धिकरण’ घटना की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए तथा यदि जाँच में जातिगत भेदभाव या छुआछूत की पुष्टि होती है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान, सामाजिक न्याय, समानता और मानव गरिमा के मूल्यों की रक्षा के लिए हमेशा संघर्ष करती रही है और आगे भी जातिगत भेदभाव तथा छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाती रहेगी।
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