Navratri 2026 की शुरुआत हो चुकी है। यह नौ दिनों तक चलता है और इसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। इसमें भक्त अपनी श्रद्धानुसार पूजा करके अपने लिए माँ से सुख, समृद्धि, शक्ति और शांति की कामना करते हैं।
पहला दिन: मां शैलपुत्री — प्रथम दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इनकी आराधना करने से जीवन में स्थायित्व और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। माँ शैलपुत्री को शक्ति और दृढ़ संकल्प दायिनी के रूप में भी जाना जाता है।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी — माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना से हमें धैर्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है। माता का यह स्वरूप तप, संयम और भक्ति के लिए जाना जाता है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा — मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाली मां चंद्रघंटा साहस और वीरता का प्रतीक मानी जाती हैं। ये अपने भक्तों को निर्भय होकर अन्याय के प्रति लड़ना सिखाती हैं। इनकी आराधना से भक्त भयमुक्त होकर अपने अंदर आत्मविश्वास जागृत कर सकते हैं।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा —माँ कूष्मांडा को सृष्टि के रचयिता के रूप में जाना जाता है। इनकी आराधना से हमारे अंदर ऊर्जा, सृजन और सकारात्मकता आती है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता — पांचवे दिन भक्तगण भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा करते हैं। ये ममता, वात्सल्य और करुणा का प्रतीक मानी जाती हैं। इनकी आराधना संतान के कल्याण और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है।
छठा दिन: मां कात्यायनी — नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना की जाती है। इन्हें शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। इनकी पूजा से भक्तों को धर्म की रक्षा करने और अन्याय के विरुद्ध लड़ने की ताकत मिलती है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि — सातवें दिन भक्त माँ कालरात्रि की पूजा करते हैं। माता का यह स्वरूप नकारात्मकता और भय का विनाश करने वाला माना जाता है।
आठवां दिन: मां महागौरी —आठवें दिन माँ महागौरी की आराधना की जाती है। महागौरी को शुद्धता, शांति और करुणा का प्रतीक माना जाता है। सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त इनकी स्तुति करते हैं।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री — माता सिद्धिदात्री की पूजा से ज्ञान, विवेक और सफलता की प्राप्ति की जाती है। उनके स्वरूप की आराधना सिद्धियों और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए भी किया जाता है।
नवरात्रि हमें नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और नारी शक्ति के सम्मान का भी संदेश देता है। माता के नौ रूप भक्तों को श्रद्धा, साहस और सद्कर्म के माध्यम से जीवन की चुनौतियों का सामना खाना सिखाते हैं।
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