वॉशिंगटन डीसी।
अमेरिका भारत को एक बार फिर वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की इजाजत दे सकता है। इस संबंध में ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह अनुमति पूरी तरह अमेरिका की निगरानी और कुछ खास शर्तों के साथ दी जाएगी। हालांकि इन शर्तों का खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है।
अगर यह फैसला लागू होता है, तो अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वर्षों से ठप पड़ा वेनेजुएला के साथ भारत का तेल व्यापार दोबारा शुरू हो सकता है। इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए एक और बड़ा विकल्प मिलेगा।
रिलायंस भी लाइन में, अमेरिका से मांगी मंजूरी
भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी वेनेजुएला से फिर से तेल खरीदने की कोशिशों में जुट गई है। कंपनी अमेरिका से विशेष मंजूरी लेने के लिए संबंधित विभागों से बातचीत कर रही है। बताया जा रहा है कि पश्चिमी देशों के रूस से तेल आयात कम करने के दबाव के चलते रिलायंस वैकल्पिक सप्लाई सोर्स सुरक्षित करना चाहती है।
रिलायंस के पास गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है, जिसकी क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। कंपनी पहले भी अमेरिका से लाइसेंस लेकर वेनेजुएला का तेल खरीद चुकी है।
अमेरिकी प्रतिबंधों ने रोका था व्यापार
वेनेजुएला OPEC का सदस्य है और उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, इसके बावजूद वह वैश्विक सप्लाई में सिर्फ करीब 1% का योगदान देता है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंध हैं।
2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे, साथ ही सेकेंडरी सेंक्शंस भी लागू किए गए थे। इसके तहत वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों और कंपनियों को अमेरिकी बाजार और बैंकिंग सिस्टम से बाहर करने की चेतावनी दी गई थी। इसी कारण भारत सहित कई देशों ने वेनेजुएला से तेल आयात बंद कर दिया था।
भारत पहले वेनेजुएला से 6% तेल खरीदता था
प्रतिबंधों से पहले भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 6% वेनेजुएला से लेता था। हालांकि 2023-24 में अमेरिका ने कुछ समय के लिए आंशिक ढील दी थी, जिसके बाद भारत ने सीमित मात्रा में फिर से तेल आयात शुरू किया।
2024 में भारत का वेनेजुएला से आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर सख्ती बढ़ा दी, जिसके बाद 2026 की शुरुआत में भारत का वेनेजुएला से आयात घटकर महज 0.3% रह गया।
व्हाइट हाउस में बड़ी बैठक, 9 लाख करोड़ के निवेश की पेशकश
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में करीब 9 लाख करोड़ रुपए के निवेश पर चर्चा हुई।
ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका यह तय करेगा कि कौन सी कंपनियां वेनेजुएला में निवेश करेंगी। उन्होंने कहा कि कंपनियों को निवेश करना होगा, मुनाफा जल्दी निकालना होगा और फिर लाभ को वेनेजुएला, अमेरिका और कंपनियों के बीच बांटा जाएगा।
तेल मुनाफे पर अमेरिका की नजर
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि वेनेजुएला अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल सौंपेगा, जिसे बाजार भाव पर बेचा जाएगा। इस बिक्री से होने वाली कमाई पर अमेरिका का नियंत्रण रहेगा। 5 करोड़ बैरल तेल की मौजूदा कीमत करीब 25 हजार करोड़ रुपए आंकी जा रही है। ट्रम्प के मुताबिक इस राशि का इस्तेमाल अमेरिका और वेनेजुएला दोनों देशों के हित में किया जाएगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और उसकी ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। अगर अमेरिका भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की मंजूरी देता है, तो इससे भारत को सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन का बड़ा फायदा मिलेगा और तेल आयात पर निर्भरता को संतुलित करने में मदद मिलेगी। इस फैसले पर अब सबकी नजर अमेरिका की शर्तों और अंतिम घोषणा पर टिकी हुई है।

