Saturday, January 24, 2026

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किंग अभी ज़िंदा है’: भारत की हार से ज़्यादा चर्चा विराट कोहली के शतक की

इंदौर |

क्रिकेट में कुछ खिलाड़ी समय के साथ बदल जाते हैं, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जो समय को अपने हिसाब से मोड़ देते हैं। विराट कोहली इस समय वनडे क्रिकेट में कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। इंदौर वनडे में भारत की हार और सीरीज़ गंवाने के बावजूद सबसे ज़्यादा चर्चा अगर किसी की रही, तो वह विराट कोहली का शानदार शतक था।

इंदौर में खेले गए इस वनडे मुकाबले में कोहली ने बेहतरीन बल्लेबाज़ी करते हुए 124 रनों की शानदार पारी खेली। हालांकि, उनकी यह पारी भारत को जीत तक नहीं पहुंचा सकी। न्यूज़ीलैंड ने मुकाबला जीतकर न सिर्फ मैच अपने नाम किया, बल्कि 37 साल बाद भारत में वनडे सीरीज़ जीतकर इतिहास भी रच दिया। इसके बावजूद, रविवार की शाम का क्रिकेटिंग नैरेटिव एक बार फिर स्कोरबोर्ड से आगे निकलकर कोहली के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा।

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कोहली की फॉर्म की दमदार वापसी

हालिया आंकड़े इस बात की साफ़ गवाही देते हैं कि यह विराट कोहली की कोई अस्थायी लय नहीं, बल्कि निरंतरता की वापसी है। पिछले सात वनडे पारियों में उन्होंने छह बार 50 से अधिक रन बनाए हैं।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 135 और 102 रन की पारियां हों या न्यूज़ीलैंड के खिलाफ वडोदरा में 93 और इंदौर में 124 रन का शतक—कोहली लगातार यह दिखा रहे हैं कि वह अब भी बड़े मौकों के खिलाड़ी हैं।

ऐसा महसूस हो रहा है मानो 2016 की घड़ी एक बार फिर चल पड़ी हो, जब कोहली सिर्फ रन नहीं बनाते थे, बल्कि विरोधी टीमों की रणनीति, धैर्य और आत्मविश्वास को भी तोड़ दिया करते थे।

टीम इंडिया की हार, लेकिन ‘किंग’ की चर्चा

इंदौर वनडे में भारत की हार के साथ ही सीरीज़ भी हाथ से निकल गई। कप्तान रोहित शर्मा एक बार फिर अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके। मध्यक्रम पर दबाव बढ़ा और गेंदबाज़ न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों पर लगाम कसने में नाकाम रहे।

इसके उलट, कोहली ने एक छोर संभाले रखा और मैच को गहराई तक ले जाने की कोशिश की। उनकी बल्लेबाज़ी में धैर्य, आक्रामकता और अनुभव—तीनों का बेहतरीन संतुलन दिखा। यही वजह रही कि हार के बाद भी सोशल मीडिया और क्रिकेट विशेषज्ञों की चर्चा का केंद्र सिर्फ एक नाम रहा—विराट कोहली।

हार के बीच उम्मीद की किरण

न्यूज़ीलैंड की इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय टीम के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन कोहली की फॉर्म ने एक बड़ी राहत जरूर दी है। यह पारी सिर्फ एक शतक नहीं थी, बल्कि उस आत्मविश्वास की वापसी का संकेत थी, जिसने कभी कोहली को आधुनिक क्रिकेट का सबसे बड़ा चेहरा बनाया था।

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इंदौर की इस हार के बावजूद, यह साफ हो गया कि ‘किंग अभी ज़िंदा है’। भले ही ट्रॉफी हाथ से निकल गई हो, लेकिन विराट कोहली की बल्लेबाज़ी ने यह भरोसा फिर जगा दिया है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स में वह एक बार फिर भारत की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।

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