नई दिल्ली।
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में CAG (Comptroller and Auditor General – नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह एक ऐसी संवैधानिक संस्था है, जो केंद्र और राज्य सरकारों के खर्चों की जांच कर यह सुनिश्चित करती है कि जनता के पैसे का सही और नियमों के अनुसार उपयोग हो रहा है या नहीं। अक्सर जब भी किसी बड़े घोटाले या सरकारी खर्चों में अनियमितता की चर्चा होती है, तो CAG का नाम सामने आता है।
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CAG क्या है और इसकी संवैधानिक स्थिति
CAG भारत के संविधान के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संस्था है। इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 में किया गया है। CAG की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और इसका कार्यकाल व सेवा शर्तें भी संविधान में निर्धारित हैं।
इस संस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
CAG न तो सरकार के अधीन काम करता है और न ही किसी मंत्रालय के निर्देशों पर निर्भर होता है। यही स्वतंत्रता इसे लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ बनाती है।
CAG के प्रमुख कार्य
CAG का मुख्य काम केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का ऑडिट करना होता है। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां आती हैं—
- केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व और व्यय का लेखा-परीक्षण
- सरकारी कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं का ऑडिट
- यह जांच करना कि सरकारी योजनाओं पर खर्च किया गया धन तय नियमों और उद्देश्यों के अनुसार है या नहीं
- वित्तीय अनियमितताओं और संसाधनों की बर्बादी को उजागर करना
- CAG की रिपोर्ट संसद और राज्य विधानसभाओं में पेश की जाती है, जहां इन पर चर्चा होती है और सरकार से जवाब मांगा जाता है।
CAG रिपोर्ट क्यों होती है इतनी अहम
CAG की रिपोर्ट को सरकार की वित्तीय सेहत का आईना माना जाता है। कई बार इन रिपोर्टों के आधार पर ही बड़े स्तर पर जांच शुरू होती है।
पिछले वर्षों में सामने आए कई चर्चित मामलों—जैसे कोयला ब्लॉक आवंटन, स्पेक्ट्रम नीति से जुड़े मुद्दे—में CAG रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई थी।
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हालांकि CAG किसी को सजा देने वाली संस्था नहीं है, लेकिन इसकी रिपोर्टें नीति निर्धारण और सुधारों की दिशा तय करने में बेहद प्रभावशाली होती हैं।
आज के समय में CAG की बढ़ती भूमिका
आज जब सरकारें बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, सामाजिक कल्याण योजनाएं और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों पर अरबों रुपये खर्च कर रही हैं, तब CAG की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
CAG यह सुनिश्चित करता है कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर सही तरीके से लागू हों।
डिजिटल ऑडिट, परफॉर्मेंस ऑडिट और रियल टाइम डेटा एनालिसिस के जरिए CAG खुद को समय के साथ आधुनिक भी कर रहा है।
राजनीतिक बहस और CAG
अक्सर CAG की रिपोर्टें राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाती हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इन रिपोर्टों का अपने-अपने तरीके से उपयोग करते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि CAG को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि संवैधानिक और तकनीकी संस्था के रूप में देखना चाहिए।
CAG का काम सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि सुधार की राह दिखाना है।
लोकतंत्र में CAG का महत्व
लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और जनता के पैसों की निगरानी करना CAG की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि CAG जैसी संस्था न हो, तो सरकारी खर्चों पर नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है।
यही कारण है कि CAG को अक्सर “लोक धन का प्रहरी” कहा जाता है। यह संस्था सरकार और जनता के बीच भरोसे की एक मजबूत कड़ी है।
कुल मिलाकर, CAG भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है। यह न केवल सरकारी खर्चों की जांच करता है, बल्कि पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही की संस्कृति को भी मजबूत करता है। आने वाले समय में जैसे-जैसे सरकारी खर्च और योजनाएं बढ़ेंगी, वैसे-वैसे CAG की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।

