चंडीगढ़।
कनाडा सरकार ने एक बार फिर इमीग्रेशन नियमों में सख्ती करते हुए प्रवासियों को बड़ा झटका दिया है। नए फैसले के तहत अब कनाडा में रह रहे प्रवासी अपने माता-पिता या दादा-दादी को स्पॉन्सर कर बुला नहीं सकेंगे। कनाडा सरकार ने पेरेंट एंड ग्रैंडपैरेंट स्पांसरशिप प्रोग्राम के तहत वर्ष 2026 के लिए नई अर्ज़ियां लेना बंद कर दिया है।
इस फैसले का सीधा असर भारतीय समुदाय, खासकर पंजाबी प्रवासियों पर पड़ेगा, जो लंबे समय से अपने बुज़ुर्ग माता-पिता को कनाडा बुलाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। अचानक लागू की गई इस रोक से प्रवासी परिवारों में मायूसी और चिंता का माहौल बन गया है।
कनाडा सरकार लगातार इमीग्रेशन नीतियों में बदलाव कर रही है और नियमों को पहले से अधिक सख्त किया जा रहा है। नए आदेश के अनुसार, वर्ष 2026 में बुज़ुर्गों, माता-पिता और दादा-दादी के लिए फैमिली स्पॉन्सरशिप के दरवाज़े फिलहाल बंद रहेंगे। इसका मतलब यह है कि फैमिली रीयूनिफिकेशन की प्रक्रिया पर अस्थायी ब्रेक लगा दिया गया है।
गौरतलब है कि पहले इस योजना के तहत स्पॉन्सर बनने वाले व्यक्ति को 20 वर्षों तक अपने बुज़ुर्ग रिश्तेदार की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी उठानी होती थी। साथ ही यह लिखित आश्वासन देना पड़ता था कि संबंधित बुज़ुर्ग कनाडा सरकार से किसी भी तरह की सामाजिक सहायता या लाभ की मांग नहीं करेगा।
कनाडा सरकार के इस फैसले से हजारों प्रवासी परिवार प्रभावित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में पंजाबी परिवार शामिल हैं। वर्षों से माता-पिता को अपने पास बुलाने की आस लगाए बैठे लोगों के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा है।

