वॉशिंगटन।
अमेरिका ने भारत, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों को G7 वित्त मंत्रियों की बैठक में आमंत्रित किया है, जो महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक संसाधनों पर केंद्रित होगी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
बैठक सोमवार को वॉशिंगटन में होगी और यह पिछले साल दिसंबर में हुई वर्चुअल बैठक और G7 शिखर सम्मेलन में की गई चर्चाओं की अगली कड़ी है। बैठक में रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी और सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा होगी।
बेसेंट ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर विशेष बैठक की मांग पिछले गर्मियों से की थी और भारत को आमंत्रित किया गया है, हालांकि अभी तक पुष्टि नहीं हुई कि भारत बैठक में भाग लेगा या नहीं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही अमेरिका के साथ 8.5 बिलियन डॉलर का समझौता किया है, जिसमें लिथियम, रियर अर्थ और अन्य खनिजों के लिए रणनीतिक रिजर्व और परियोजना पाइपलाइन तैयार की जाएगी।
चीन पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
G7 देशों-अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और यूरोपीय संघ—की खपत का बड़ा हिस्सा अभी भी चीन पर निर्भर है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, चीन तांबा, लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रियर अर्थ्स में 47 से 87 प्रतिशत तक संसाधित करता है। हाल ही में चीन ने जापान को रियर अर्थ और डुअल-यूज आइटम की सप्लाई सीमित कर दी, जिससे पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बैठक का मकसद नीतियों का समन्वय करना, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना और रक्षा एवं हाई-टेक उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षा के लिए रणनीतियों पर चर्चा करना है। बेसेंट ने कहा कि चीन के साथ बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद अमेरिका की सोयाबीन खरीद और अमेरिकी कंपनियों को खनिज सप्लाई का वादा अभी भी पूरा हो रहा है। यह बैठक वैश्विक रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा और चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

