बीकानेर। Holika Dahan 2026 इस बार होलिका दहन की तिथि और मुहूर्त को लेकर लोगों में काफी उलझन है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में राजस्थान के बीकानेर क्षेत्र के विद्वानों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर इस विवाद पर स्पष्ट जानकारी दी है। विद्वानों के अनुसार, भद्रा काल में होलिका दहन शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है, इसलिए मुहूर्त का सही निर्धारण बेहद आवश्यक है।
पंचांगों में मतभेद, परंपरा को लेकर बढ़ी चर्चा
बीकानेर के ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि अलग-अलग पंचांगों में होलिका दहन की तिथि को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
वासुदेव धर्म सागर पंचांग के अनुसार होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त 3 मार्च की अल सुबह 4:06 बजे बताया गया है। वहीं, निर्णय सागर पंचांग और अन्य ग्रंथों में यह उल्लेख मिलता है कि भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना उचित और धर्मसम्मत है।
चूंकि इस वर्ष 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी लग रहा है, इसलिए तिथि और मुहूर्त को लेकर भ्रम और अधिक बढ़ गया है। विद्वानों का कहना है कि ग्रहणकाल के दौरान या भद्रा में होलिका दहन करना निषिद्ध है, अतः सही समय का पालन आवश्यक है।
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विद्वानों की अपील अफवाहों से बचें, प्रामाणिक पंचांग का पालन करें
प्रेस वार्ता में विद्वानों ने आमजन से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपुष्ट मुहूर्तों पर ध्यान न दें।
उन्होंने कहा कि परंपरा और शास्त्र दोनों का सम्मान तभी संभव है जब लोग मान्य पंचांग और विद्वानों की सलाह के अनुसार ही होलिका दहन करें। साथ ही यह भी कहा गया कि गलत समय पर किए गए अनुष्ठान का फल प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय पंडितों व मान्यता प्राप्त पंचांगों को ही आधार माना जाए।
बीकानेर में होली का खुमार होलाष्टक लगते ही शुरू होती है रम्मत
धार्मिक चर्चा से परे, बीकानेर में होली का उत्सव अपने अनोखे रंग-रूप के लिए जाना जाता है। जैसे ही होलाष्टक शुरू होता है, शहर में उत्सव का माहौल रंगीन हो उठता है और शुरू होती है प्रसिद्ध रम्मत यह एक अद्भुत लोकनाट्य परंपरा है जो लगभग 300 साल पुरानी बताई जाती है।
रम्मत में लड़के-लड़कियां रूप बदलकर स्वांग रचते हैं और गलियों में घूमते हुए समाज को हास्य, लावणी और ख्याल के माध्यम से संदेश देते हैं। यह परंपरा बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है।
300 साल पुरानी लोक परंपरा रम्मत की खासियत
बीकानेर में होली की शुरुआत रम्मत से होती है, जिसे स्थानीय कलाकार महीनों की तैयारी के बाद प्रस्तुत करते हैं।
रम्मत का आरंभ ‘फक्कड़ दाता’ की प्रस्तुति से होता है। स्थानीय कलाकार रात 10 बजे से प्रदर्शन शुरू करते हैं, जो सूर्योदय तक चलता है।
रम्मत में—
संवाद गाकर प्रस्तुत किए जाते हैं, पुरुष कलाकार महिलाओं का रूप धारण करते हैं, मंचन से पहले सभी कलाकार भगवान शिव की आराधना करते हैं, और पारंपरिक वेशभूषा, साज-सज्जा और मेकअप को पुराने समय जैसा ही रखा जाता है। यह लंबी तैयारी और पारंपरिक रूप रम्मत को एक विशिष्ट पहचान देता है।
गणेश वंदना से आरंभ, ख्याल गीत मुख्य आकर्षण
रम्मत की शुरुआत गणेश वंदना से की जाती है। इसके बाद भगवान कृष्ण, शिव और होली से जुड़े भजनों की गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई देती है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कलाकार रातभर गायन और अभिनय करते हैं।
ख्याल गीत रम्मत की आत्मा माने जाते हैं। इनमें समाज, राजनीति, परिवार और व्यवस्था पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष किए जाते हैं और हास्य के साथ गंभीर संदेश भी दिए जाते हैं।
रम्मत को देखने हर साल हजारों लोग बीकानेर पहुंचते हैं। पूरा शहर एक सप्ताह तक इस लोकनाट्य की रंगत में डूब जाता है। रेगिस्तान की यह सांस्कृतिक धरोहर होली को और भी विशिष्ट बनाती है।
Holika Dahan 2026 को लेकर असमंजस भले बढ़ा हो, लेकिन विद्वानों ने स्पष्ट कर दिया है कि सही मुहूर्त का निर्धारण भद्रा और ग्रहण की स्थिति देखकर ही किया जाना चाहिए। साथ ही बीकानेर की पारंपरिक रम्मत होली के उत्सव में एक अनोखा सांस्कृतिक रंग भरती है, जो न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देशभर से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।

