नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। इसी बीच भारत में संभावित एलपीजी संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में देश में एलपीजी आपूर्ति की स्थिति और संभावित विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सरकार ने इस संकट से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए एक रणनीतिक योजना सक्रिय कर दी है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल प्राथमिकता घरों में इस्तेमाल होने वाले रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को दी जा रही है, ताकि आम लोगों पर संकट का असर कम से कम पड़े।
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मौजूदा संकट की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना बताया जा रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है।
इन आयातों का करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों से आता है और यह आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत तक पहुंचती है। इस मार्ग के बाधित होने से एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
सरकार अब वैकल्पिक स्रोतों से एलपीजी आयात की संभावनाएं तलाश रही है, लेकिन फिलहाल उपलब्ध स्टॉक को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर वितरित किया जा रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही प्राथमिकता
भारत में सालाना लगभग 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से करीब 87 प्रतिशत गैस घरेलू उपयोग यानी घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होती है, जबकि 13 प्रतिशत गैस वाणिज्यिक क्षेत्र जैसे होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों में उपयोग की जाती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके चलते वाणिज्यिक क्षेत्र में गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस सिलेंडर की कमी की शिकायत भी की है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में होटल उद्योग से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उनके संचालन पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने उठाए आपात कदम
संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कई आपात कदम उठाए हैं। रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादन को कुछ हद तक कम कर गैस उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
इसके अलावा घरेलू गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका उद्देश्य गैस की जमाखोरी और काला बाजारी को रोकना है।
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सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आयातित एलपीजी का एक हिस्सा जरूरी गैर-घरेलू सेवाओं जैसे अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सुरक्षित रखा जाए।
विशेष समिति का गठन
गैस वितरण की निगरानी के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति भी बनाई गई है। यह समिति होटल, रेस्टोरेंट और अन्य उद्योगों से आने वाली मांग की समीक्षा करेगी और जरूरत तथा उपलब्धता के आधार पर गैस की आपूर्ति का फैसला करेगी।
सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी एक बयान जारी कर कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है, लेकिन उत्पादन बढ़ाने और वितरण को संतुलित रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्थिति पर लगातार नजर
सरकार ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान से बचाने के लिए सभी विकल्पों पर काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी देखने को मिल सकता है।

