लद्दाख।
लद्दाख की ठंडी और साफ़ रातों में हाल ही में आकाश में दिखाई दी लाल चमक ने लोगों को चौंका दिया। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों ने इसे मोबाइल कैमरों में कैद किया और सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह नज़ारा चर्चा का विषय बन गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह दुर्लभ खगोलीय घटना ‘रेड ऑरोरा’ (Red Aurora) हो सकती है, जो सामान्य तौर पर ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखाई देती है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियों में निचले अक्षांशों तक भी नज़र आ सकती है। लद्दाख जैसे ऊँचाई वाले और प्रदूषण-रहित इलाके में इसका दिखना इसे और खास बनाता है।
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रेड ऑरोरा दरअसल सूर्य से निकलने वाली ऊर्जावान कणों की धाराओं और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बीच होने वाली क्रिया का परिणाम होता है। जब सौर पवनें पृथ्वी के वायुमंडल से टकराती हैं, तो ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसें उत्तेजित होकर अलग-अलग रंगों की रोशनी उत्सर्जित करती हैं। आमतौर पर हरे और नीले रंग के ऑरोरा अधिक देखे जाते हैं, जबकि लाल रंग अपेक्षाकृत दुर्लभ होता है और यह ऊँचाई पर मौजूद ऑक्सीजन परमाणुओं की विशेष प्रतिक्रिया से बनता है। यही वजह है कि रेड ऑरोरा कम ही दिखाई देता है और वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
लद्दाख में इस तरह की लाल आभा दिखने के पीछे सौर गतिविधियों में बढ़ोतरी को एक कारण माना जा रहा है। खगोलविदों का कहना है कि सूर्य पर सनस्पॉट्स और सोलर फ्लेयर की सक्रियता बढ़ने पर पृथ्वी के मैग्नेटोस्फियर पर उसका असर दिखाई देता है। इसी क्रम में कई बार ध्रुवीय रोशनी अपने सामान्य दायरे से बाहर फैल जाती है। लद्दाख की भौगोलिक स्थिति, ऊँचाई और साफ़ आसमान ने इस दृश्य को स्पष्ट रूप से दिखने में मदद की।
स्थानीय प्रशासन और पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि इस दुर्लभ घटना ने क्षेत्र में वैज्ञानिक और खगोल-पर्यटन की संभावनाओं को उजागर किया है। पहले से ही लद्दाख को स्टारगेजिंग और नाइट स्काई फोटोग्राफी के लिए जाना जाता है, और रेड ऑरोरा की खबर ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। पर्यटकों के लिए यह अनुभव अनोखा रहा, वहीं स्थानीय युवाओं में खगोल विज्ञान के प्रति उत्साह भी बढ़ा है।
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वैज्ञानिक समुदाय इस घटना के डेटा और तस्वीरों का अध्ययन कर रहा है ताकि यह समझा जा सके कि किस स्तर की सौर गतिविधि पर ऐसे नज़ारे निचले अक्षांशों में दिख सकते हैं। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन या पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में दीर्घकालिक बदलावों से सीधे तौर पर ऑरोरा का संबंध नहीं है, लेकिन सौर चक्रों की तीव्रता इसमें अहम भूमिका निभाती है। आने वाले समय में यदि सूर्य की गतिविधियां इसी तरह सक्रिय रहीं, तो भारत के अन्य ऊँचाई वाले इलाकों में भी ऐसे दृश्य कभी-कभार दिखाई दे सकते हैं।
कुल मिलाकर, लद्दाख की रातों में दिखा रेड ऑरोरा न सिर्फ़ एक खूबसूरत प्राकृतिक नज़ारा रहा, बल्कि इसने विज्ञान, पर्यटन और आम लोगों की जिज्ञासा को एक साथ जोड़ दिया। यह घटना याद दिलाती है कि पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच होने वाली प्रक्रियाएं कितनी रोमांचक और अप्रत्याशित हो सकती हैं, और सही समय व स्थान मिलने पर प्रकृति अपने सबसे दुर्लभ रंग भी दिखा सकती है।

