26 अगस्त से तीन दिवसीय कथा, करीब 100 साल बाद दोबारा शुरू हुई संध्या आरती से श्रद्धालुओं में उत्साह
कलायत।विश्व पटल पर प्राचीन धार्मिक एवं ऐतिहासिक पहचान रखने वाले कलायत के श्री कपिल मुनि तीर्थ के संरक्षण और विकास को लेकर जनजागरण अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। श्री कपिल मुनि तीर्थ कमेटी के नेतृत्व में 36 बिरादरी के लोग एकजुट होकर इस प्राचीन धरोहर को संवारने और इसकी धार्मिक महत्ता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों में जुटे हैं।
इसी कड़ी में तीर्थ परिसर में श्रद्धालुओं एवं आमजन के सहयोग से सफाई और विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। कमेटी पदाधिकारियों का कहना है कि सामूहिक प्रयासों से तीर्थ के स्वरूप को निखारने के साथ-साथ इसकी प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखने का प्रयास जारी रहेगा।
श्री कपिल मुनि तीर्थ कमेटी के प्रधान राजू कौशिक ने बताया कि करीब 100 वर्षों के बाद तीर्थ परिसर में संध्या आरती का सिलसिला दोबारा शुरू किया गया है। इससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। कमेटी का उद्देश्य श्री कपिल मुनि तीर्थ की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए इसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि भगवान कपिल मुनि की महिमा और तीर्थ के इतिहास से श्रद्धालुओं को परिचित करवाने के लिए 26 अगस्त से तीन दिवसीय कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा आयोजन को लेकर मंदिर पुजारी संजय गौतम एवं अनिरुद्ध गौतम के साथ विमर्श कर तैयारियां की जा रही हैं।
लोक निर्माण विश्रामगृह में आयोजित बैठक में कमेटी प्रधान राजू कौशिक ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं तीर्थ संरक्षण अभियान को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान कपिल मुनि के जीवन, दर्शन और तीर्थ की धार्मिक महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
बैठक में उपप्रधान आर.एस. धानियां, नंबरदार संजय सिंगला, पार्षद रवींद्र निर्मल बंटी, जगदीय रायका, मा. कुलदीप भट्ट, मुकेश पाराशर, श्रवण धीमान, प्रीत जगदेव, प्रदीप राणा, अमित वाल्मीकि, विनोद जेष्ठ, प्रवीण कांसल, राजेश बेदी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कमेटी ने क्षेत्रवासियों से तीर्थ संरक्षण अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग देने की अपील की। पदाधिकारियों ने कहा कि जनसहयोग से श्री कपिल मुनि तीर्थ को भव्य स्वरूप देने के साथ इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।
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