नई दिल्ली/वॉरसॉ। भारत और पोलैंड के संबंधों में पाकिस्तान को लेकर एक बार फिर तल्खी सामने आई है। सोमवार को नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पोलैंड के विदेश मंत्री एवं उप-प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के बीच हुई बातचीत के दौरान पाकिस्तान के मुद्दे पर खुलकर मतभेद दिखे। जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने साझेदार देशों से उम्मीद करता है कि वे आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाएं और भारत के पड़ोस में आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी भी तरह का समर्थन न दें।
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जयशंकर ने पोलैंड के पाकिस्तान के साथ बढ़ते संपर्कों, खासकर अक्टूबर 2025 में सिकोरस्की की पाकिस्तान यात्रा, पर कड़ी आपत्ति जताई। यह यात्रा मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव के ठीक बाद हुई थी, जिसे लेकर भारत सरकार पहले से ही असहज थी। हैदराबाद हाउस में बातचीत के दौरान जयशंकर ने इसे सीधे तौर पर उठाते हुए कहा कि भारत को अपने साझेदारों से जिम्मेदार और संतुलित रुख की अपेक्षा है।
पोलैंड की ओर से भी पलटवार देखने को मिला। पोलिश विदेश मंत्री ने रूस के साथ भारत के सैन्य और ऊर्जा संबंधों पर नाराजगी जताई। इसके जवाब में जयशंकर ने यूरोपीय संघ द्वारा भारत के व्यापार और रूस से तेल आयात को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों को “चुनिंदा निशाना साधने” की नीति बताया और कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा।
इस बहस के बीच भारत की जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट और ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर श्रीपर्णा पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोलैंड के ऐतिहासिक पाकिस्तान प्रेम की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने लिखा कि 1947 में आजादी के बाद पोलैंड ने पाकिस्तान को तकनीकी और सैन्य मदद दी थी। पोलिश एयरमैन के एक समूह ने पाकिस्तान एयर फोर्स की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा 1965 के भारत-पाक युद्ध से पहले पोलैंड ने पाकिस्तान को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई किए, जबकि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान भी पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के खिलाफ कड़े रुख से दूरी बनाए रखी।
हालांकि, रक्षा मामलों की विशेषज्ञ स्वास्ति राव ने इस इतिहास को थोड़ा अलग नजरिए से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों में कई पोलिश एयरमैन पाकिस्तान पहुंचे, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह पोलिश सरकार की आधिकारिक नीति का हिस्सा हो। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1947 से 1991 तक पोलैंड, सोवियत ब्लॉक का हिस्सा होने के कारण, भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार रहा।
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कूटनीतिक तनाव के बावजूद भारत और पोलैंड के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 200 प्रतिशत बढ़कर 7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देश सीधी उड़ानों, टेक्नोलॉजी सहयोग और निवेश बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं। पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री का यह दौरा यूरोपीय नेताओं की भारत यात्राओं की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें जर्मनी और फ्रांस के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया है कि रणनीतिक साझेदारी और ऐतिहासिक मतभेद, दोनों ही भारत-पोलैंड संबंधों का हिस्सा बने हुए हैं।

