Thursday, January 22, 2026

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सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामला: ईडी ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 21 ठिकानों पर छापेमारी की

सबरीमाला।

सबरीमाला अयप्पा मंदिर से जुड़े बहुचर्चित स्वर्ण चोरी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में एक साथ 21 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित तौर पर मंदिर से जुड़े सोने से मढ़े तांबे के कलात्मक पैनलों और अन्य संपत्तियों के गबन से अर्जित अवैध धन को ठिकाने लगाने (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच के तहत की गई है।
ईडी की यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत चल रही है। एजेंसी ने 9 जनवरी 2026 को इस मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट दर्ज की थी। इससे पहले दिसंबर की शुरुआत में कोल्लम के जांच आयुक्त एवं विशेष न्यायाधीश ने ईडी को इस मामले में औपचारिक जांच की अनुमति दी थी।

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ईडी की कोच्चि जोनल इकाई द्वारा की गई छापेमारी में तिरुवनंतपुरम स्थित त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड का मुख्यालय भी शामिल रहा। इसके अलावा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और CPI(M) नेता ए. पद्मकुमार के अलप्पुझा जिले के अरनमुला स्थित आवास, मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के पुलिमथु स्थित घर, पूर्व टीडीबी आयुक्त और अध्यक्ष एन वासु के पेट्टा स्थित आवास तथा पूर्व कार्यकारी अधिकारी मुरारी बाबू के कोट्टायम जिले के पेरुन्ना स्थित घर पर भी तलाशी ली गई। ईडी अधिकारियों ने तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित ‘स्मार्ट क्रिएशंस’ नामक मेटल वर्क्स यूनिट के मालिक पंकज भंडारी के आवास और कार्यालय, तथा कर्नाटक के बल्लारी में इस मामले के आरोपी जौहरी गोवर्धन के निजी परिसरों पर भी छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी रही। यह पूरा मामला केरल हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच टीम (SIT – क्राइम ब्रांच) की कई एफआईआर पर आधारित है। एसआईटी के अनुसार, इस कथित साजिश में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अधिकारी, निजी व्यक्ति, बिचौलिये और जौहरी शामिल थे। अब तक एसआईटी 13 लोगों को आरोपी बना चुकी है, जिनमें सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी कंदरारु राजीवरु का नाम भी शामिल है। एसआईटी का आरोप है कि 1998 में उद्योगपति विजय माल्या द्वारा दान किए गए सोने से मढ़े पैनलों को 2019 में “मरम्मत” के नाम पर निजी व्यक्ति उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंपा गया, जो कानून का उल्लंघन था। जांच में यह भी सामने आया कि पैनलों को शुद्ध तांबे का बताकर गलत जानकारी दी गई ताकि आरोपियों को कानूनी संरक्षण मिल सके। यह घोटाला 2025 में तब उजागर हुआ जब आंतरिक सतर्कता जांच में पाया गया कि मरम्मत के बाद लौटाए गए पैनलों में सोने की मात्रा काफी कम हो गई थी। आरोप है कि रासायनिक प्रक्रिया के जरिए सोना निकाला गया और उसे बाजार में बेचा गया। ईडी अब दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, बेनामी लेनदेन, नकदी और कीमती धातुओं की जांच कर रही है। साथ ही, मंदिर से जुड़े अन्य वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे से संबंधित संभावित घोटालों की भी पीएमएलए के तहत पड़ताल की जा रही है।

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