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तिरंगे की कहानी: कैसे बना भारत की आन, बान और शान का प्रतीक?

कुसुम शर्मा 15 अगस्त 2026 को भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। हमारे देश का यह तिरंगा स्वतंत्रता के संघर्ष का साक्षी और संप्रभुता का प्रतीक है। भारत के पहले झंडे का डिजाइन...

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<span class="title-highlight-color">तिरंगे की कहानी:</span> कैसे बना भारत की आन, बान और शान का प्रतीक?
कुसुम शर्मा
कुसुम शर्मा

15 अगस्त 2026 को भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। हमारे देश का यह तिरंगा स्वतंत्रता के संघर्ष का साक्षी और संप्रभुता का प्रतीक है। भारत के पहले झंडे का डिजाइन 1904 में स्वामी विवेकानंद जी की शिष्या भगिनी निवेदिता ने बनाया था। उस ध्वज में लाल रंग स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक था और पीला रंग संघर्ष और विजय का प्रतीक था।

22 जुलाई 1947 को पिंगली वेंकैया ने भारत के झंडे का एक और प्रारूप तैयार किया था। वर्ष 1921 में महात्मा गांधी जी के आग्रह पर झंडे का एक और डिजाइन बनाया गया, जिसमें मध्य में चरखा दर्शाया गया था। यह सभी समुदायों के एकीकरण का प्रतीक था।
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1931 में एक नए झंडे का प्रारूप तैयार किया गया, जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां थीं। मध्य में नीले रंग का चक्र बनाया गया। ध्वज के तीनों रंग अलग-अलग महत्व के प्रतीक हैं—

केसरिया रंग: साहस, बलिदान और त्याग का प्रतीक है।
सफेद रंग: शांति और सच्चाई का संदेश देता है।
हरा रंग: समृद्धि और हरियाली को दर्शाता है।
अशोक चक्र: जीवन में निरंतर प्रगति और गतिशीलता का प्रतीक है।

26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता लागू की गई, जिसमें भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फहराने, प्रदर्शित करने और उसके उपयोग से संबंधित नियमों और दिशानिर्देशों को स्पष्ट किया गया है। तिरंगे की मर्यादा, प्रतिष्ठा और सम्मान को बनाए रखने के लिए देश के प्रत्येक नागरिक को इन नियमों का पालन करना आवश्यक है।

कपड़ा और सामग्री: मूल संहिता के अनुसार तिरंगे का कपड़ा केवल खादी, हाथ से काते गए कपास के कपड़े या रेशम का होना चाहिए। वर्ष 2021 में किए गए संशोधन के बाद मशीन से बने पॉलिएस्टर के झंडे के उपयोग की अनुमति दी गई।

झंडे का आकार: झंडे का आकार आयताकार होना चाहिए, जिसमें लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए। तिरंगे को सम्मानजनक स्थान पर ही फहराना चाहिए, ताकि वह ऊंचाई पर स्पष्ट रूप से फहरता हुआ दिखाई दे।

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तिरंगे के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है—

इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि तिरंगे को फहराते समय केसरिया रंग ऊपर की ओर हो।
झंडे को जमीन पर नहीं गिरने देना चाहिए।
तिरंगे के ऊपर किसी अन्य झंडे को नहीं फहराया जाना चाहिए।
कभी भी फटा हुआ या क्षतिग्रस्त झंडा नहीं फहराना चाहिए।
झंडे का उपयोग किसी भी व्यावसायिक उद्देश्य, विज्ञापन या लोगो के रूप में नहीं किया जा सकता।
तिरंगे का उपयोग किसी गाड़ी या किसी अन्य वस्तु को ढकने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
झंडे पर कुछ भी प्रिंट या लिखना अथवा तिरंगे के कपड़े से वस्त्र बनाकर पहनना नहीं चाहिए।
राष्ट्रीय शोक के अवसर को छोड़कर झंडे को कभी भी आधा झुका कर नहीं फहराया जाता है।

तिरंगा प्रगतिशील भारत की पहचान और सम्मान का प्रतीक है। यह प्रत्येक नागरिक का गौरव है और इसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

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