नई दिल्ली।
जोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बू को तलाक से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित एक अदालत ने उन्हें करीब ₹14 हजार करोड़ (लगभग 1.7 बिलियन डॉलर) का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। इसे अब तक भारत से जुड़े सबसे महंगे तलाक मामलों में से एक माना जा रहा है। वेम्बू की पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन एक शिक्षाविद और बिजनेस प्रोफेशनल हैं, जबकि दंपती का एक बेटा भी है।
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श्रीधर वेम्बू ने आईआईटी मद्रास से पढ़ाई के बाद अमेरिका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय से पीएचडी की और वर्ष 1993 में प्रमिला श्रीनिवासन से विवाह किया था। 1996 में उन्होंने सॉफ्टवेयर कंपनी एडवेंटनेट की स्थापना की, जिसे बाद में 2009 में जोहो कॉर्पोरेशन के नाम से जाना गया। दोनों करीब तीन दशकों तक कैलिफोर्निया में रहे।
वर्ष 2019 में वेम्बू भारत लौट आए और तमिलनाडु के अपने पैतृक गांव से कंपनी का संचालन शुरू किया। इसके दो साल बाद 2021 में उन्होंने तलाक की याचिका दायर की। इसके बाद यह मामला अदालत तक पहुंचा और अब इस पर बड़ा आर्थिक आदेश सामने आया है।
प्रमिला श्रीनिवासन ने अदालत में आरोप लगाया कि वेम्बू ने उन्हें और उनके बेटे को छोड़ दिया तथा जोहो से जुड़ी संपत्तियों और शेयरों को जटिल लेन-देन के जरिए भारत स्थानांतरित कर दिया, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनी के अधिकतर शेयर वेम्बू की बहन राधा वेम्बू और भाई सेकर वेम्बू के पास हैं, जबकि श्रीधर वेम्बू के पास सीमित हिस्सेदारी ही बची है।
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मामले पर श्रीधर वेम्बू की ओर से उनके वकील क्रिस्टोफर सी. मेल्चर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अदालत के सामने तथ्य सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किए गए और आदेश कानूनी रूप से चुनौती योग्य है। वकील का दावा है कि वेम्बू ने पहले अपनी पत्नी को कंपनी में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। इस आदेश के खिलाफ अपील की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि जोहो कॉर्पोरेशन आज वैश्विक स्तर पर एक बड़ी टेक कंपनी बन चुकी है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक श्रीधर वेम्बू की कुल संपत्ति करीब 6 बिलियन डॉलर आंकी जाती है, जिससे वे भारत के प्रमुख अरबपतियों में शामिल हैं। तलाक से जुड़ा यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

